देश

ओल्ड राजेंद्र नगर हादसे में CBI ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, वरिष्ठ MCD अफसरों को 'क्लीन चिट', किस पर गिरेगी गाज?

MCD Officials Clean Chit Old Rajinder Nagar: ओल्ड राजेंद्र नगर कोचिंग हादसे में CBI की फाइनल रिपोर्ट। वरिष्ठ MCD अधिकारियों को मिली क्लीन चिट, लेकिन जूनियर इंजीनियर (JE) समेत तीन ग्राउंड लेवल इंजीनियरों की खुली पोल। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Image

ओल्ड राजेंद्र नगर हादसे में CBI ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट, वरिष्ठ MCD अफसरों को 'क्लीन चिट', किस पर गिरेगी गाज?

Raus IAS Circle CBI Report 2026: दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित 'राऊ'स IAS स्टडी सर्किल' (Rau's IAS Study Circle) के बेसमेंट में पानी भरने से तीन UPSC अभ्यर्थियों की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। सीबीआई ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में अपनी सप्लीमेंट्री फाइनल रिपोर्ट (सप्लीमेंट्री क्लोजर रिपोर्ट) दाखिल कर दी है। इस रिपोर्ट ने जहां दिल्ली नगर निगम (MCD) के शीर्ष और वरिष्ठ अधिकारियों को एक बड़ी कानूनी राहत दी है, वहीं जमीनी स्तर पर तैनात जूनियर इंजीनियर (JE) और सहायक अभियंता (AE) स्तर के अधिकारियों की घोर लापरवाही और सच छिपाने की साजिश को बेनकाब कर दिया है।

सीबीआई ने कोर्ट को स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ 'अपराधिक लापरवाही' का कोई पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला है, इसलिए उनके हिस्से की जांच बंद (क्लोजर) की जा रही है, लेकिन विभाग के जूनियर स्तर के तीन अधिकारियों की भूमिका सीधे तौर पर ड्यूटी में चूक और धोखाधड़ी की रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

-27 जुलाई 2024 को दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित राऊ'स IAS स्टडी सर्किल के बेसमेंट में अचानक पानी भरने से तीन UPSC अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी।

-मामले की जांच बाद में CBI को सौंपी गई थी।

-CBI ने 8 जुलाई 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट में सप्लीमेंट्री फाइनल रिपोर्ट दाखिल की है।

CBI का मुख्य निष्कर्ष

-जांच में किसी भी वरिष्ठ MCD अधिकारी के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला।

-इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई।

-रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्य उनके खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

बेसमेंट के उपयोग को लेकर अहम खुलासे

-MCD के रिकॉर्ड में बेसमेंट को केवल स्टोरेज और पार्किंग के लिए स्वीकृति मिली थी।

-जांच में पाया गया कि वास्तव में बेसमेंट का इस्तेमाल कोचिंग संस्थान परीक्षा हॉल (Exam Hall) और कोचिंग गतिविधियों के लिए कर रहा था।

-संस्थान ने फायर NOC के लिए दिए गए दस्तावेजों में भी उल्लेख किया था कि कोचिंग सेंटर बेसमेंट सहित सभी मंजिलों से संचालित हो रहा है।

जूनियर इंजीनियर (JE) पर CBI की टिप्पणी

-तत्कालीन JE अर्नव कुमार दत्ता को बेसमेंट के वास्तविक उपयोग की जानकारी थी।

-निरीक्षण के दौरान ली गई तस्वीरों और रिकॉर्ड में Exam Hall का उल्लेख मौजूद था।

-CBI के अनुसार JE ने अपनी रिपोर्ट में जानबूझकर बेसमेंट को Furniture Storage, "Book Stack", "Stationery Storage" आदि बताया।

-रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने तथ्यों को छिपाया और उच्च अधिकारियों को वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया।

-CBI ने इसे ड्यूटी में लापरवाही माना है।

सहायक अभियंता (AE) पर टिप्पणी

-तत्कालीन AE राजीव जैन को दस्तावेजों की जांच और बेसमेंट के उपयोग का सत्यापन करना चाहिए था।

-CBI के अनुसार उन्होंने पर्याप्त जांच नहीं की।

-बेसमेंट के दुरुपयोग का पता लगाने में विफल रहे।

-रिपोर्ट में उनके खिलाफ भी लापरवाही और ड्यूटी में चूक का उल्लेख है।

कार्यकारी अभियंता (EE) पर टिप्पणी

-तत्कालीन EE कुमार महेंद्र को रिकॉर्ड और लीज डीड की जांच करनी थी।

-लीज डीड में स्पष्ट रूप से लिखा था कि बेसमेंट का उपयोग कोचिंग संस्थान के रूप में किया जाएगा।

-इसके बावजूद उन्होंने बेसमेंट के कथित दुरुपयोग का पता नहीं लगाया।

-CBI ने उनके आचरण को भी लापरवाही बताया है।

फायर NOC से जुड़े निष्कर्ष

-17 अक्टूबर 2023 को राऊ'स IAS स्टडी सर्किल ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया था।

-आवेदन में स्पष्ट लिखा गया था कि कोचिंग सेंटर बेसमेंट समेत सभी मंजिलों पर संचालित हो रहा है।

-जनवरी 2024 में दिल्ली फायर सर्विस ने निरीक्षण किया।

-प्रारंभिक निरीक्षण में कुछ कमियां मिलीं।

-बाद में कमियां दूर किए जाने का दावा किया गया।

-9 जुलाई 2024 को भवन को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया।

शिकायतों को लेकर CBI के निष्कर्ष

-26 जून 2024 को CPGRAMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी कि बेसमेंट में अवैध रूप से कोचिंग और टेस्ट सेंटर चल रहा है तथा छात्रों की जान खतरे में है।

-शिकायतकर्ता ने 15 और 22 जुलाई को रिमाइंडर भी भेजे।

-जांच में सामने आया कि शिकायत को संबंधित विभाग तक पहुंचाने में 22 दिन की देरी हुई।

-देरी का कारण CPGRAMS पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी बताया गया।

-PGC ने इस तकनीकी समस्या की जानकारी DARPG को ईमेल के जरिए दी थी।

MCD की कार्रवाई

-MCD ने अगस्त 2023 में भवन के खिलाफ दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 345A के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

-नोटिस में भवन के कथित दुरुपयोग को रोकने के निर्देश दिए गए थे।

-मामले में सुनवाई भी हुई थी।

-हालांकि अंतिम स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।

CBI रिपोर्ट का निष्कर्ष

-CBI के अनुसार जांच में कुछ अधीनस्थ अधिकारियों की भूमिका और लापरवाही सामने आई।

-लेकिन वरिष्ठ MCD अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने योग्य साक्ष्य नहीं मिले।

-इसलिए वरिष्ठ अधिकारियों के संबंध में सप्लीमेंट्री क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है।

-अब राउज एवेन्यू कोर्ट इस रिपोर्ट पर विचार करेगा और आगे की कार्रवाई तय करेगा।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

और पढ़ें
End of Article