Wheat-Paddy Procurement Traders Commission: केंद्र सरकार ने सोमवार को गेहूं और धान की खरीद में शामिल आढ़तियों और सहकारी समितियों के कमीशन की दरों में वृद्धि को मंजूरी दे दी है। यह बदलाव 2026-27 के रबी विपणन सत्र से लागू होगा। इस निर्णय का मकसद किसानों से अनाज की खरीद प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाना और आढ़तियों तथा सहकारी समितियों को सहयोग के लिए प्रोत्साहित करना है।
गेहूं का कमीशन बढ़ा
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक पंजाब और हरियाणा में आढ़तियों को गेहूं के लिए मिलने वाला कमीशन 46 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 50.75 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। वहीं राजस्थान में यह दर 41.40 रुपये से बढ़ाकर 45.67 रुपये प्रति क्विंटल हो जाएगी। यह संशोधन विभिन्न राज्यों की सरकारों की मांग पर किया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), राज्य सरकारों और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के प्रतिनिधियों वाली उप-समिति की सिफारिश पर आधारित है। इस समिति ने मौजूदा दरों की समीक्षा की और उन्हें बढ़ाने की सिफारिश की थी।
धान का कमीशन भी बढ़ा
धान की खरीद पर आढ़तियों का कमीशन भी बढ़ाया गया है। अब उन्हें 45.88 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय 50.61 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा। इससे धान की खरीद प्रक्रिया में भी तेजी आने की उम्मीद है।
सहकारी समितियों के लिए दरें
सहकारी समितियों को भी गेहूं और धान की खरीद पर अतिरिक्त लाभ मिलेगा। गेहूं के लिए कमीशन अब 27 रुपये से बढ़कर 29.79 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। धान के लिए यह 32 रुपये से बढ़ाकर 35.30 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। सरकारी नीति के अनुसार, आधुनिक अनाज भंडारों में खरीद पर मंडियों में लागू दर का 50 प्रतिशत ही कमीशन मिलेगा।
खरीद प्रक्रिया में सुधार और समर्थन
सरकार ने कहा कि यह संशोधन खरीद प्रणाली की दक्षता सुनिश्चित करने और उन एजेंसियों को सहयोग देने के उद्देश्य से किया गया है, जो खरीद कार्यों में सरकार का समर्थन करती हैं। यह कदम किसानों और खरीद एजेंसियों दोनों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
रबी फसलों की खरीद जारी
वर्तमान में रबी फसलों, खासकर गेहूं और धान की खरीद जारी है। आने वाले हफ्तों में खरीद में और तेजी आने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को समय पर भुगतान और आढ़तियों को उचित कमीशन देने से खरीद प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होगी।
इस तरह, केंद्र सरकार की यह नई नीति न केवल आढ़तियों और सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि किसानों को भी उनकी फसल के सही मूल्य और बेहतर सेवा सुनिश्चित करेगी। यह कदम देश में अनाज की खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
