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इस बार पाकिस्तान नहीं, चीन क्यों जा पहुंचा भारत के दुश्मन की गोद में...अमेरिका-ईरान युद्ध में ड्रैगन का क्या रोल?

China Pakistan Mediate Peace Talks in Iran War: पश्चिम एशिया में जोरदार लड़ाई के बीच, पाकिस्तान और चीन ने ईरान में युद्ध खत्म करने के लिए एक नई पहल पेश की है, जिसमें तुरंत युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है।

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इस बार पाकिस्तान नहीं, चीन क्यों जा पहुंचा भारत के दुश्मन की गोद में...अमेरिका-ईरान युद्ध में ड्रैगन का क्या रोल?

Iran War: चीन और पाकिस्तान ने पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के लिए पांच सूत्री प्रस्ताव रखा है जिसमें खाड़ी क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता की बहाली और होर्मुज जलडमरूमध्य से पोतों के सुरक्षित आवागमन का आह्वान किया गया है। क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा को लेकर एक दिवसीय बीजिंग दौरे पर आए पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इसहाक डार के साथ चीन के विदेश मंत्री वांग यी की वार्ता के बाद मंगलवार को यह शांति प्रस्ताव पेश किया गया।

दोनों नेताओं ने खाड़ी एवं पश्चिम एशिया क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा की और डार ने वांग को तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के साथ हाल में हुई अपनी उस बातचीत के बारे में जानकारी दी जिसका उद्देश्य अमेरिका एवं ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए वार्ता को बढ़ावा देना था।

पाकिस्तान चीन युद्ध खत्म कराने एक साथ आए, 5 सूत्री प्रस्ताव लाए

डार एवं वांग की वार्ता के बाद, दोनों देशों ने खाड़ी क्षेत्र और पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने के साथ-साथ जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए पांच सूत्री प्रस्ताव रखा।

इन प्रस्तावों में शत्रुता को तुरंत समाप्त करने, जल्द से जल्द शांति वार्ता शुरू करने, गैर-सैन्य लक्ष्यों की सुरक्षा और नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर की सर्वोच्चता बनाए रखने जैसे प्रावधान शामिल थे।

संयुक्त बयान के अनुसार, 'चीन और पाकिस्तान ने शत्रुता को तत्काल समाप्त करने और संघर्ष को और अधिक फैलने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने का आह्वान किया। युद्ध प्रभावित सभी क्षेत्रों में मानवीय सहायता की अनुमति दी जानी चाहिए।' उन्होंने यथाशीघ्र शांति वार्ता शुरू करने का आह्वान किया।

बयान में कहा गया है, 'ईरान और खाड़ी देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, राष्ट्रीय स्वतंत्रता और सुरक्षा बनी रहनी चाहिए। संघर्षों के समाधान के लिए संवाद एवं कूटनीति ही एकमात्र व्यवहार्य विकल्प है।' उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य संघर्ष के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा के सिद्धांत का पालन किया जाना चाहिए।

संयुक्त बयान में कहा गया है, 'चीन और पाकिस्तान संघर्ष में शामिल पक्षों से आम नागरिकों और गैर-सैन्य लक्ष्यों पर हमले तुरंत रोकने, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (आईएचएल) का पूरी तरह से पालन करने और ऊर्जा, विलवणीकरण तथा बिजली केंद्रों सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे एवं परमाणु ऊर्जा संयंत्रों जैसे शांतिपूर्ण परमाणु बुनियादी ढांचे पर हमले बंद करने का आह्वान करते हैं।'

दोनों देशों ने नौवहन के मार्गों की सुरक्षा का भी आह्वान किया और होर्मुज जलडमरूमध्य तथा इसके आसपास के जलक्षेत्र को 'माल और ऊर्जा के परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक नौवहन मार्ग' बताया। संयुक्त बयान के अनुसार, 'चीन और पाकिस्तान सभी पक्षों से होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों और चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, असैन्य और वाणिज्यिक जहाजों को शीघ्र एवं सुरक्षित मार्ग प्रदान करने और जलडमरूमध्य से सामान्य आवागमन को जल्द से जल्द बहाल करने का आह्वान करते हैं।'

अंत में, उन्होंने तनाव को समाप्त करने में संयुक्त राष्ट्र चार्टर की प्रमुखता को बनाए रखने का आह्वान किया। इससे पहले, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा था कि इस्लामाबाद और बीजिंग के बीच रणनीतिक साझेदारी है, जो क्षेत्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर 'घनिष्ठ समन्वय और नियमित परामर्श' से परिभाषित होती है।

चीन के लिए रवाना होने से पहले डार ने इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों के साथ एक चतुष्पक्षीय बैठक की।

इस दौरान डार वांग से टेलीफोन पर बातचीत और पाकिस्तान में चीन के राजदूत के साथ बैठकों के माध्यम से चीन से संपर्क में रहे। इससे पहले चीन ने कहा कि तेल लेकर आ रहे उसके तीन जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और उसने इसे संभव बनाने और इसमें समन्वय के लिए संबंधित पक्षों को धन्यवाद दिया।

चीन ने होर्मुज को लेकर पहली बार बात की

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में ईरान का नाम लिए बिना कहा कि संबंधित पक्षों के समन्वय के बाद हाल ही में तीन चीनी जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया। उन्होंने कहा, 'हम संबंधित पक्षों की सहायता के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं।'

ईरान खाड़ी से जलडमरूमध्य पार करने वाले तेल के जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित कर रहा है। माओ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास का जलक्षेत्र अंतरराष्ट्रीय माल और ऊर्जा व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा कि चीन खाड़ी में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए शत्रुता तत्काल समाप्त करने का आह्वान करता है।

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन वर्षों से ईरानी तेल का एक बड़ा आयातक रहा है। चीन ने अपने जहाजों के होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने के बारे में पहली बार बात की। ऐसी खबरें हैं कि ईरान घनिष्ठ रणनीतिक संबंधों को देखते हुए चीनी जहाजों को जलडमरूमध्य पार करने दे रहा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद से, चीन सभी देशों से सैन्य अभियान तुरंत रोकने का आह्वान कर रहा है।

पाकिस्तान को कर दी थी ईरान ने ना, क्या चीन की सुनेगा?

यह तब हुआ जब अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान के साथ 15-सूत्रीय शांति योजना साझा की थी, जिसे तेहरान ने ठुकरा दिया और युद्ध समाप्त करने के लिए सामने से ईरान ने अपनी पांच मांगें रख दी थीं।

अमेरिका के साथ ईरान का युद्ध जारी

अमेरिका के साथ ईरान का युद्ध जारी

हालांकि, अब चीन ने पाक के साथ जो प्रस्ताव रखा है, उसपर कई लोग सोच रहे हैं कि क्या चीन, US और ईरान के बीच शांति कायम करने में और बड़ी भूमिका निभाएगा। US विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी और ईरान के जाने-माने विशेषज्ञ, वली नासर ने यह विचार सामने रखा कि बीजिंग एक गारंटर के तौर पर उभर सकता है। उन्होंने X पर लिखा, 'ईरान ने US के साथ किसी भी डील में गारंटी मांगी है। खबर है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री, इस संभावित डील के लिए एक गारंटर ढूंढ़ने बीजिंग जा रहे हैं। पूरी संभावना है कि US के साथ बातचीत के लिए ईरान की यही शर्त है। और विदेश मंत्री, वॉशिंगटन और बीजिंग दोनों के सामने यह विचार रखे बिना चीन नहीं जा रहे होंगे। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि चीन इस पर राजी होगा, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों में बीजिंग अब सबसे आगे है।'

लेकिन इस्लामाबाद की कायद-ए-आज़म यूनिवर्सिटी के एमेरिटस प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने अल जजीरा की एक रिपोर्ट में इस विचार को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'यह धारणा कि बीजिंग तेहरान के लिए गारंटर के तौर पर आगे आएगा, इसके विश्लेषणात्मक रूप से कम चांस है।'

चीन को इससे क्या फायदा होगा?

बीजिंग के लिए, इस संघर्ष को खत्म होते देखने के साफ फायदे हैं। यह एशियाई महाशक्ति 2025 में ईरान से हर दिन लगभग 1.38 मिलियन बैरल तेल आयात करती है, जो उसके कुल आयात का अनुमानित 12 प्रतिशत है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि चीन के कच्चे तेल के आयात का 45 से 50 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जिससे इसमें होने वाली कोई भी रुकावट उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बन जाती है।

चीन के लिए, ईरान एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार भी है। इसके अलावा, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) में किए गए निवेश भी हैं, जिनकी इस क्षेत्र में उसे सुरक्षा करनी है। जैसा कि एक विशेषज्ञ ने कहा, 'एक लंबा चलने वाला युद्ध और तेल की ऊंची कीमतें चीन की अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं।'

क्या ईरान इस शांति प्रस्ताव को स्वीकार करेगा?

जहां बीजिंग ने शांति स्थापित करने की कोशिशों में पाकिस्तान को अपना समर्थन दिया है, वहीं तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत में इस्लामाबाद को मध्यस्थ के तौर पर मानने से इनकार कर दिया है।

इससे पहले, मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने कहा था, 'अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं होगी; सिर्फ बिचौलियों के जरिए बहुत ज्यादा और बेतुकी मांगें रखी जा रही हैं। अमेरिका की 'कूटनीति' लगातार बदलती रहती है; हमारा रुख साफ है। पाकिस्तान के मंच उनके अपने हैं; हमने उनमें हिस्सा नहीं लिया।'

उन्होंने आगे कहा, 'युद्ध खत्म करने की क्षेत्रीय अपीलों का स्वागत है, लेकिन यह भी याद रखें कि इसे शुरू किसने किया था!' इसके अलावा, कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि चीन-पाकिस्तान का यह प्रस्ताव अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई के असली मुद्दे को हल नहीं करता। अमेरिका के युद्ध विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने X पर लिखा, 'यह कोई गंभीर प्रस्ताव नहीं है। यह अमेरिका, इजरायल और पूरे क्षेत्र के लिए ईरान से पैदा होने वाले खतरों से जुड़े एक भी मुद्दे को हल नहीं करता।' फिलहाल, अमेरिका द्वारा छेड़े गए युद्ध में चीन का मध्यस्थ के तौर पर दखल देना एक अलग दिलचस्प भू-राजनीतिक मोड़ है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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