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कौन हैं ईरान का जिंदा शहीद 'सईद जलीली', नहीं करने देना चाहता अमेरिका के साथ शांति वार्ता?

Who is Saeed Jalili: 60 वर्षीय सईद जलीली ने राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के शासनकाल में सरकार में सेवा दी थी। उन्हें एक कट्टरपंथी माना जाता है।

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कौन हैं ईरान का जिंदा शहीद 'सईद जलीली', नहीं करने देना चाहता अमेरिका के साथ शांति वार्ता?

Saeed Jalili: लंदन स्थित सरकार-विरोधी मीडिया आउटलेट 'ईरान इंटरनेशनल' ने सोमवार को बताया कि ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबफ ने तेहरान के उन राजनेताओं की आलोचना की है, जो अमेरिका के साथ संघर्ष-विराम वार्ता का विरोध कर रहे हैं। गालिबफ जो विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ मिलकर अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत में तेहरान के प्रतिनिधिमंडल का संयुक्त रूप से नेतृत्व करते हैं, उन्होंने इन वार्ताओं का विरोध करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे अमेरिका के साथ बातचीत को रोकने की कोशिश करके ईरान को तबाह कर देंगे। रिपोर्ट में दो कट्टरपंथी राजनेताओं सईद जलीली और अमीर-हुसैन साबेती का नाम लिया गया है, जिन्हें गालिबफ ने चरमपंथी करार दिया है। इनमें सईद जलीली ही ईरान के जिंदा शहीद कहलाते हैं और ये ही वो शख्स हैं, जिनको लेकर कहा जा रहा था कि ये ईरान में अली लारिजानी की जगह लेंगे।

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी, इजरायली हवाई हमलों में मारे गए थे, जिसके बाद बताया जा रहा था कि सईद जलीली वह व्यक्ति हैं जो लारीजानी का उत्तराधिकारी बन सकते हैं। कौन हैं सईद जलीली?

60 वर्षीय जलीली ने राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के शासनकाल में सरकार में सेवा दी थी। उन्हें एक कट्टरपंथी माना जाता है। जलीली ने लारीजानी और बासिज कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी के निधन पर शोक व्यक्त किया था। जलीली ने कहा था, 'ये कदम न केवल दुश्मन को उस दलदल से बाहर निकालने में नाकाम रहेंगे जिसमें वह धंस चुका है, बल्कि उसकी हार और अपमान की प्रक्रिया को भी तेज कर देंगे।'

जलीली कौन हैं? शुरुआती साल

'संडे गार्डियन' के अनुसार, जलीली का जन्म 1965 में ईरान के मशहद में हुआ था। उनके पिता, जो कुर्द थे, एक स्कूल प्रिंसिपल के तौर पर काम करते थे। उनकी मां अजरबैजानी मूल की थीं और बताया जाता है कि वे अर्दबिल इलाके से थीं। जलीली एक मध्यम-वर्गीय परिवार में पले-बढ़े। उन्होंने इमाम सादेक यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में PhD की, जहां उनका मुख्य विषय 'इस्लामी राजनीतिक विचार' था। इसके बाद जलीली ने उसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू कर दिया। जलीली ने ईरान-इराक युद्ध में भाग लिया था और 'ऑपरेशन कर्बला-5' के दौरान घायल हो गए थे।

जिंदा शहीद क्यों कहते हैं?

1987 को 60 वर्षीय जलीली ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान अपना दाहिना पैर खो दिया था। इस वजह से उनके समर्थकों के बीच उन्हें 'जिंदा शहीद' यानी लिविंग मार्टियर कहा जाता है। युद्ध के बाद उन्होंने शिक्षा और कूटनीति के क्षेत्र में अपना करियर आगे बढ़ाया।

-1989-1997: विदेश मंत्रालय में अलग-अलग पदों पर रहे।

-2000: सुप्रीम लीडर के दफ्तर में करंट अफेयर्स मामलों के प्रमुख रहे।

-2005-2007: विदेश मंत्रालय में यूरोप, अमेरिका मामलों के डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी रहे।

-2007-2013: सुप्रीम राष्ट्रीय सुरक्षा काउंसिल में सेक्रेटरी रहे। फिर काउंसिल में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि बने। राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ चुके हैं।

-2013 में उन्होंने राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा था। जिसमें वे तीसरे नंबर पर रहे थे। इसके बावजूद ईरान के रूढ़िवादी राजनीतिक हलकों में उनका प्रभाव आज भी मजबूत माना जाता है।

उन्होंने 2021 और 2024 में भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ा। उन्हें कूटनीति और राजनीति में लंबा अनुभव है। सरकारी सेवा में आने से पहले जलीली अकादमिक क्षेत्र से जुड़े रहे और उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि भी हासिल की। बाद में वे ईरान के विदेश मंत्रालय में शामिल हुए और कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।

2007 से 2013 के बीच, राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के कार्यकाल में जलीली ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार रहे। इस दौरान उन्होंने पश्चिमी देशों के साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत का नेतृत्व किया।

2015 में रहे मुख्य परमाणु वार्ताकार

जलीली ईरान के प्रमुख नेता और न्यूक्लियर वार्ताकार रहे हैं। वह ईरान में परमाणु बम बनाने के पक्षधर रहे हैं और 2015 में उन्होंने ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार के तौर पर अहम भूमिका निभाई थी। उस दौरान परमाणु बम नहीं बनाने के समझौते को लेकर सबसे ज्यादा विरोध जलीली ने ही किया था। उनका मानना था कि अगर ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार होगा, तो उससे कोई टकराने की हिमाकत नहीं करेगा। विश्लेषकों की मानें तो सईद जलीली हार्ड-लाइनर रहे हैं। जलीली साल 2007 से 2013 तक पश्चिमी देशों से वार्ता में ईरान का नेतृत्व कर चुके हैं।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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