कौन हैं आरिफ हबीब? जो PAK की सरकारी एयरलाइन के बने मालिक; गुजरात से है कनेक्शन
- Edited by: अनुराग गुप्ता
- Updated Dec 24, 2025, 08:35 AM IST
Pakistan Airline: 'बदहाल' पाकिस्तान की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती ही जा रही है। न उससे अपने देश की समस्याएं सुलझती हैं और न ही कर्ज संभल पा रहा है। इस बीच, गुजरात से ताल्लुक रखने वाले आरिफ हबीब ने एयरलाइन की 75 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली है। दरअसल, आरिफ हबीब समूह ने 135 अरब रुपये की निर्णायक बोली लगाई थी।
निजी हाथों में PIA की जिम्मेदारी (फोटो साभार: AP)
Pakistan Airline: 'बदहाल' पाकिस्तान की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती ही जा रही है। न उससे अपने देश की समस्याएं सुलझती हैं और न ही कर्ज संभल पा रहा है। इस बीच, पाकिस्तान ने सरकारी एयरलाइन को निजी हाथों पर सौंप दिया। पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन पीआईए के निजीकरण की प्रक्रिया मंगलवार को पूरी हो गई। एयरलाइन को 135 अरब रुपये में एक स्थानीय निवेश कंपनी के नेतृत्व वाले गठजोड़ को बेचा गया।
किस-किसने लगाई बोली
राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित निजीकरण कार्यक्रम में तीन पात्रता-पूर्व बोलीदाताओं- आरिफ हबीब समूह, लकी सीमेंट और निजी एयरलाइन एयरब्लू ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) के लिए अपनी-अपनी सीलबंद बोलियां जमा कीं। निर्धारित नियमों के मुताबिक, दो सबसे ऊंची बोलियां लगाने वाली कंपनियों आरिफ हबीब और लकी सीमेंट को खुली नीलामी में प्रतिस्पर्धा का मौका दिया गया। आखिर में आरिफ हबीब समूह ने 135 अरब रुपये की निर्णायक बोली लगाई।
पीआईए की जिम्मेदारी अब आरिफ हबीब समूह के पास होगी उन्होंने एयरलाइन को खरीद लिया है तो चलिए जानते हैं कि आरिफ हबीब कौन हैं?
कौन हैं आरिफ हबीब?
आरिफ हबीब पाकिस्तान के जाने माने व्यवसायी और 'आरिफ हबीब ग्रुप' के चेयरमैन हैं। उनका समूह फर्टिलाइजर, सीमेंट, स्टील और रियल एस्टेट सहित कई क्षेत्रों में सक्रिय है। आरिफ हबीब का परिवार मूल रूप से गुजरात से ताल्लुक रखते हैं। उनकी जड़ें गुजरात के कच्छ इलाके से जुड़ी हैं। विभाजन के समय परिवार पाकिस्तान चला गया था, जहां कराची में आरिफ हबीब का जन्म हुआ था।

निजी हाथों में PIA की जिम्मेदारी
आरिफ हबीब ने खरीदी 75 फीसदी हिस्सेदारी
सरकार ने शुरुआत में पीआईए में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की पेशकश की थी। सफल बोलीदाता को शेष 25 प्रतिशत हिस्सेदारी 90 दिनों के भीतर खरीदने का विकल्प मिलेगा। नियमों के मुताबिक, प्रारंभिक बिक्री से मिलने वाली राशि का 92.5 प्रतिशत एयरलाइन में पुनर्निवेश के लिए जाएगा, जबकि 7.5 प्रतिशत राशि सरकार को मिलेगी।
निवेशक को अगले पांच वर्षों में 80 अरब रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता भी देनी होगी। इससे पहले सरकार ने पीआईए की 654 अरब रुपये की देनदारियां अपने जिम्मे ली थीं। यह पीआईए को बेचने का दूसरा प्रयास था। पिछले साल पहला प्रयास अपेक्षित कीमत न मिलने के कारण असफल रहा था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस सौदे को पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा लेनदेन बताते हुए बोली प्रक्रिया को पारदर्शी करार दिया।