Who is Aroh Barjatya: बीते 8 अप्रैल को दुनिया एक बड़ी खगोलीय घटना की गवाह बनी। इस दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण दिखाई दिया। भारत तो नहीं, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई यूरोपियन देशों ने भी अंतरिक्ष में घटी इस घटना का दीदार किया। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने सूर्य ग्रहण के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग कर दुनिया को इस रोमांचित करने देने वाली घटना का दिखाया।
इसके साथ ही नासा ने सूर्य ग्रहण के दौरान वायुमंडल पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने के लिए साउंडिंग रॉकेट मिशन भी लॉन्च किया था। इसके तहत नासा ने तीन साउंडिंग रॉकेट छोड़े थे, ताकि यह अध्ययन किया जा सके कि जब पृथ्वी के एक हिस्से पर सूरज की रोशनी क्षण भर के लिए कम हो जाती है तो उसका ऊपरी वायुमंडल कैसे प्रभावित होता है। खास बात यह है कि नासा के इस खास मिशन का नेतृत्व भारतीय मूल के आरोह बड़जात्या ने किया था। वह फ्लोरिडा में एंब्री-रिडल एयरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी में आभियांत्रिकी भौतिकी के प्रोफेसर और अंतरिक्ष और वायुमंडलीय उपकरण प्रयोगशाला के निदेशक हैं। आइए जानते हैं उनके बारे में...
खुद दी मिशन की जानकारी
आरोह बड़जात्या ने प्रक्षेपण के बाद लिंक्डइन पर मिशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लिखा, सहयोगी संस्थानों में मेरे सभी साथी अनुसंधानकर्ताओं और एम्ब्री-रिडल एयरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी के बेहद सक्षम और प्रतिभाशाली छात्रों के साथ-साथ, सबसे महत्वपूर्ण रूप से, नासा वॉलॉप्स साउंडिंग रॉकेट प्रोग्राम ऑफिस और नासा गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में छह महीने में छह जटिल रॉकेट मिशन को पूरा करने में मदद करने वाले सभी लोगों के प्रति मेरा अत्यंत आभार।
हैदराबाद, जयपुर, सोलापुर कई शहरों में की पढ़ाई
केमिकल इंजीनियर अशोक कुमार बड़जात्या और गृहिणी राजेश्वरी के बेटे आरोह ने स्कूल की पढ़ाई मुंबई के निकट पातालगंगा, हैदराबाद, जयपुर, पिलानी, सोलापुर से की और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री सोलापुर स्थित वालचंद प्रौद्योगिकी संस्थान से प्राप्त की। आरोह की बहन अपूर्वा बड़जात्या ने बताया कि वह 2001 में अमेरिका चले गए थे और उन्होंने वहां उटाह स्टेट यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।
