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कोरोना के नए स्ट्रेन JN.1 को WHO ने 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' की लिस्ट में किया शामिल; जानिए इसका मतलब

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 20, 2023, 07:19 AM IST

Corona New Variant: विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना के हर वैरिएंट को दो तरह से वर्गीकृत करता है। पहला- 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' और दूसरा- 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न'। नए वैरिएंट JN.1 को वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट में वर्गीकृत किया गया है और कहा गया है कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा नहीं है।

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कोरोना का नया वैरिएंट

Photo : iStock

Corona New Variant: सर्दियां और त्योहारों का मौसम नजदीक आते ही कोरोना वायरस ने एक बार फिर से टेंशन बढ़ा दी है। कोरोना का नया वैरिएंट JN.1 इस बार चिंता का कारण बना हुआ है। सिंगापुर, अमेरिका और चीन में यह वैरिएंट तेजी से फैल रहा है। भारत में भी केरल और तमिलनाडु में इस वैरिएंट की पुष्टि हुई है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को अलर्ट रहने को कहा है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोविड-19 के नए वैरिएंट को लेकर बड़ा अपडेट दिया है।

डब्ल्यूएचओ ने कोरोना के नए वैरिएंट JN.1 को 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया है। इसके साथ ही कहा है कि इस वैरिएंट से सार्वजनिक स्वास्थ्य को ज्यादा खतरा नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जेएन.1 द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम को वर्तमान में कम माना गया है। बता दें, JN.1 को पहले इसके मूल वंश BA.2.86 के एक भाग के रूप में 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' में वर्गीकृत किया गया था।

इस सूची में शामिल करने का क्या मतलब?

बता दें, विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना के हर वैरिएंट को दो तरह से वर्गीकृत करता है। पहला- 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' और दूसरा- 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न'। हर वैरिएंट को उसके प्रकार, जोखिम और संक्रमण दर के अनुसार प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट में उन स्ट्रेन को रखा जाता है, जिनसे सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा कम होता है। हालांकि, इनका म्यूटेशन चौंकाने वाला होता है। वहीं वैरिएंट ऑफ कंसर्न में उन स्ट्रेन को रखा जाता है, जो काफी खतरनाक होते हैं। इससे पहले कोरोना के अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और ओमिक्रॉन को वैरिएंट ऑफ कंसर्न में वर्गीकृत किया जा चुका है।

क्या काम करेगी वैक्सीन?

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वैरिएंट को लेकर एक और राहत भरी खबर सुनाई है। कहा गया है कि मौजूदा वैक्सीन जेएन.1 और कोविड -19 वायरस के अन्य परिसंचारी वैरिएंट में कारगर हैं और संक्रमण व मृत्युदर को रोकते हैं। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि एजेंसी के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, 8 दिसंबर तक संयुक्त राज्य अमेरिका में सबवेरिएंट जेएन.1 अनुमानित 15% से 29% मामलों का कारण बनता है। इसमें कहा गया है कि वर्तमान में इस बात का कोई सबूत नहीं है कि JN.1 वर्तमान में प्रसारित अन्य वैरिएंट की तुलना में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बढ़ा जोखिम बन सकता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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