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'हम युद्ध का नहीं, संवाद और कूटनीति का समर्थन करते हैं', ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बोले पीएम मोदी; पढ़ें बड़ी बातें

BRICS summit: पीएम मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में युद्ध को लेकर भारत की नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि हम युद्ध का नहीं, संवाद और कूटनीति का समर्थन करते हैं। रूस में मौजूद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बुधवार को द्विपक्षीय बैठक करेंगे। ये बातचीत कई मायने में खास होगी।

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?

World News: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और अन्य देशों के नेताओं की मेजबानी की। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि खाद्य, ऊर्जा, स्वास्थ्य और जल क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करना और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण सभी देशों के लिए प्राथमिकता वाले मुद्दे हैं।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम युद्ध का नहीं, संवाद और कूटनीति का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह हमने मिलकर कोविड को हराया, उसी तरह हम सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध भविष्य के लिए नए अवसर सृजित करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

आतंकवाद के मुद्दे पर क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी?

पीएम मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे पर कहा कि हम सभी को आतंकवाद और आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए दृढ़ता और सर्वसम्मति से सहयोग करना होगा। आतंकवाद की चुनौती पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसे गंभीर मुद्दे पर दोहरे मानदंडों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अपने देशों के युवाओं में कट्टरपंथ को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि हमें अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सम्मेलन के लंबित मुद्दे पर मिलकर काम करना होगा। हमें साइबर सुरक्षा, सुरक्षित और संरक्षित एआई के लिए वैश्विक नियमन के वास्ते काम करना चाहिए। हमें पूरी दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश करना चाहिए और वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए सर्वसम्मति से अपनी आवाज उठानी चाहिए।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि ब्रिक्स एक ऐसा संगठन है जो समय के अनुसार खुद को बदलने की इच्छाशक्ति रखता है। उन्होंने कहा कि हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व व्यापार संगठन जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विभिन्न विचारों और विचारधाराओं के समागम से बना ब्रिक्स आज विश्व को सकारात्मक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।

सभी मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभा सकता है ब्रिक्स

पीएम मोदी ने आगे कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की आशाओं, आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। मेरा मानना है कि एक विविध और समावेशी मंच के रूप में ब्रिक्स सभी मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। हमें विश्व को यह संदेश देना चाहिए कि ब्रिक्स एक विभाजनकारी समूह नहीं, बल्कि एक जनहित समूह है।

राष्ट्रपति पुतिन ने वैश्विक नेताओं की मेजबानी की

ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन को रूस द्वारा पश्चिमी देशों की ताकत को चुनौती देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पुतिन ने बुधावर को ब्रिक्स की बैठक की शुरुआत में अपने एजेंडे के हिस्से के रूप में वित्त क्षेत्र में सहयोग के बढ़ते दायरे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल होने वाले देश क्षेत्रीय संघर्षों सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तथा अन्य देशों को शामिल कर समूह के विस्तार पर भी चर्चा करेंगे।

पुतिन ने कहा, 'विश्व पटल पर ब्रिक्स की रणनीति वैश्विक समुदाय के मुख्य हिस्से के प्रयासों की पुष्टि करती है। इसे ही तथाकथित वैश्विक बहुलता कहा जाता है।' ब्रिक्स की शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके सदस्य थे हालांकि अब इसके दायरे को बढ़ाकर समूह में ईरान, मिस्र, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया है। इसके अलावा तुर्किये, अजरबैजान और मलेशिया ने औपचारिक रूप से सदस्य बनने के लिए आवेदन किया है तथा कई अन्य देशों ने इसमें शामिल होने में रुचि दिखाई है।

कजान शहर में ब्रिक्स के तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में 36 देशों के नेता शिरकत कर रहे हैं। यूक्रेन पर रूस की कार्रवाई को लेकर उसे अलग-थलग करने के अमेरिका के प्रयासों की विफलता को भी सम्मेलन के जरिए सामने लाने का प्रयास है। रूस ने ब्रिक्स को विदेश नीति पर आयोजित 'अब तक का सबसे बड़ा आयोजन' बताया है। शिखर सम्मेलन की शुरुआत से पहले पुतिन से मंगलवार को मोदी, शी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने मुलाकात की थी। पुतिन सम्मेलन से इतर विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने वाले हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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