Failure To Impose Forced Labour Prohibition: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने जबरन श्रम पर प्रतिबंध लगाने में विफल रहने के लिए भारत सहित 60 देशों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी श्रम मंत्री जेमिसन ग्रीर का कहना है कि हमारे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात को रोकने में विफलता अस्वीकार्य है।
जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं से क्या दिक्कतें?
ग्रीर ने कहा कि जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं का आयात एक ऐसी स्थिति पैदा करता है जहां अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। अमेरिकी श्रम मंत्री ने जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत पर 12.5 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।
यूएसटीआर ने कहा है, लगभग एक सदी से संयुक्त राज्य अमेरिका ने जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा रखा है। अब हमारे व्यापारिक साझेदारों के लिए भी ऐसा ही करने का समय आ गया है। आज, राजदूत ग्रीर ने यह निर्धारित किया कि जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने में विफल रहने से संबंधित 60 अर्थव्यवस्थाओं के कार्य, नीतियां और प्रथाएं अनुचित हैं और अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालती हैं या उसे प्रतिबंधित करती हैं। प्रस्तावित प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई के संबंध में सार्वजनिक टिप्पणियां प्रस्तुत करने के बारे में अधिक जानने के लिए देखें:
भारत ने बंधुआ मजदूरी संबंधी आरोपों को खारिज किया
भारत ने बंधुआ मजदूरी संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए अमेरिका से इन जांचों को समाप्त करने की मांग की है। भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के ढांचे के भीतर किया जाना चाहिए। ग्रीर ने कहा कि कुछ व्यापारिक साझेदारों ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए शुरुआती कदम उठाए हैं। इनमें अमेरिका, मेक्सिको-कनाडा के बीच समझौते (यूएसएमसीए) और पारस्परिक व्यापार समझौतों के तहत जतायी गयी प्रतिबद्धताएं शामिल हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि हर व्यापारिक साझेदार को यह सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे कि वैश्विक व्यापार बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा न दे और उसे स्थायी न बनाए। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने एक बयान में कहा कि भारत, चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सऊदी अरब सहित 54 देशों ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता दिखाई है। बयान के अनुसार, छह अर्थव्यवस्थाएं - कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मेक्सिको और पाकिस्तान- ऐसी हैं, जिन्होंने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध तो लगाया है, लेकिन उसे प्रभावी रूप से लागू नहीं कर पाई हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने प्रस्ताव दिया है कि जिन अर्थव्यवस्थाओं ने बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया है या जिन्होंने पारस्परिक व्यापार समझौते के तहत ऐसा प्रतिबंध लगाने और लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है अथवा जिन्होंने कुछ विशेष प्रकार की ऐसी वस्तुओं के आयात को रोकने वाली आंशिक व्यवस्था लागू की है, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए। बयान में कहा गया है, अन्य सभी अर्थव्यवस्थाओं के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की दर प्रस्तावित की है।
यह 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क उन 54 देशों पर लागू होगा, जिनमें भारत भी शामिल है। यूएसटीआर ने वस्त्र क्षेत्र के लिए एक विशेष तंत्र का भी प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत कुछ देशों से अमेरिका में आयात किए जाने वाले परिधानों और वस्त्रों की एक निर्धारित मात्रा को कम शुल्क दर पर प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है। उसने इच्छुक पक्षों से 22 जून तक सुनवाई में शामिल होने के लिए आवेदन और अपने बयान का सार प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही छह जुलाई तक लिखित टिप्पणियां भी मांगी गई हैं।
बयान में कहा गया है, यूएसटीआर इन प्रस्तावित कार्रवाइयों पर सात जुलाई को सुनवाई करेगा।
