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अमेरिका ने क्यूबा पर और कड़े किए प्रतिबंध, राउल कास्त्रो के पोते और तेल कंपनी 'अबापेट' को किया बैन, ऊर्जा संकट गहराने की आशंका

अमेरिका ने क्यूबा की अर्थव्यवस्था को झटका देने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं। प्रतिबंधों के दायरे में राउल कास्त्रो के पोते और राष्ट्रीय तेल कंपनी 'अबापेट' को शामिल किया गया है, जिससे द्वीप पर ऊर्जा संकट गहराने का खतरा है।

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क्यूबा के अंतरराष्ट्रीय प्रेस केंद्र के निदेशक एबेल एर्नेस्टो डेरीवेट विडाल (बाएं) और क्यूबा के उपप्रधानमंत्री ऑस्कर पेरेज-ओलिवा फ्रागा

Photo : AP

अमेरिका ने क्यूबा की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने और उसके जारी संकट को और गहरा करने के उद्देश्य से गुरुवार को नए कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिकी सरकार के इस कदम का सीधा असर क्यूबा के पहले से चरमरा रहे पावर ग्रिड और ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ने का अंदेशा है।

पावर ग्रिड ठप करने और मेंटेनेंस रोकने की साजिश

'अबापेट' क्यूबा के जर्जर बिजली ग्रिड को चालू रखने के लिए आवश्यक विशेष उपकरणों और स्पेयर पार्ट्स के आयात का काम संभालती है। ऑब्सीडियन रिस्क एडवाइजर्स के प्रतिबंध विशेषज्ञ और प्रबंध निदेशक ब्रेट एरिक्सन के अनुसार इन प्रतिबंधों का मुख्य लक्ष्य क्यूबा की महत्वपूर्ण मशीनरी और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति को रोकना है, जिससे वहां जारी ऊर्जा संकट और भयावह रूप ले ले। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ट्रंप प्रशासन का इरादा क्यूबा पर हर तरफ से शिकंजा कसना है, ताकि वहां सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा हो सके।

24 घंटे से अधिक का ब्लैकआउट, मानवीय संकट की चेतावनी

क्यूबा में बीते कुछ समय से पूरे द्वीप पर बिजली कटौती बेहद आम हो चुके हैं। ईंधन के घटते भंडार और पुराने हो चुके पावर ग्रिड के चलते रोजाना बिजली कटौती का समय 24 घंटे से भी ऊपर चला गया है। इस संकट की शुरुआत तब और तेज हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी के अंत में उन देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी जो क्यूबा को तेल बेचते या मुहैया कराते हैं। एरिक्सन ने चेतावनी देते हुए कहा, सिद्धांत रूप में अमेरिका का लक्ष्य नागरिकों के लिए इतनी भारी मुश्किलें और मानवीय पीड़ा खड़ी करना है कि उनके पास अपनी सरकार के खिलाफ उठ खड़े होने और तख्तापलट करने के अलावा कोई विकल्प न बचे। यह एक तरह से जानबूझकर मानवीय संकट पैदा करने का प्रयास है।

महंगाई बढ़ने और प्रतिबंधों को बाईपास करने की मजबूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि क्यूबा सरकार के पास इन प्रतिबंधों से बचने और अवैध या नए रास्तों से मेंटेनेंस पार्ट्स की खरीद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। हालांकि, इसके लिए उन्हें काफी अधिक लागत चुकानी होगी, जिससे देश में महंगाई और बढ़ेगी तथा अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगेगा। गौरतलब है कि अमेरिका और क्यूबा के बीच इस साल के शुरू में हुई वार्ता अब पूरी तरह ठप हो चुकी है। यह नया प्रतिबंध ऐसे समय में आया है जब कुछ ही घंटे पहले क्यूबा के अधिकारियों ने जून में स्वीकृत ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की जानकारी देने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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