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नोबेल पुरस्कार से चूके तो ट्रंप की जगी नई ख्वाहिश! चाहते हैं 'लेखन' के लिए मिल जाए उन्हें पुलित्जर

पेंडलटन स्थित टी. एड गैरीसन एरिना में अपने रिपब्लिकन समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने रूसी जांच की कवरेज के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले पत्रकारों पर निशाना साधा। ट्रंप ने दावा किया कि रूस से जुड़ी जांच पर उनकी रिपोर्टिंग गलत थी। ट्रंप ने समर्थकों की भीड़ से कहा, 'मुझे नोबेल पुरस्कार नहीं मिला।'

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।

Photo : AP

Donald Trump: नोबेल शांति पुरस्कार पाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चाहत पूरी नहीं हुई है। इसकी कसक उनके मन में है। वह दूसरे पुरस्करों से खुद को दिलासा देना चाहते हैं। इसलिए वह चाहते हैं कि नोबेल न सही तो कम से कम उन्हें पुलित्जर पुरस्कार से ही सम्मानित कर दिया जाए। अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते हैं कि उन्हें उनके 'लेखन' के लिए पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया जाए। बुधवार को साउथ कैरोलिना में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हों नोबेल एवं पुलित्जर दोनों पुरस्कार से वंचित किया गया है। ट्रंप ने दावा किया कि उनके 'लेखन' के लिए भी उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए।

'लेखन के लिए भी मुझे पुलित्जर पुरस्कार मिलना चाहिए था'

पेंडलटन स्थित टी. एड गैरीसन एरिना में अपने रिपब्लिकन समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने रूसी जांच की कवरेज के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले पत्रकारों पर निशाना साधा। ट्रंप ने दावा किया कि रूस से जुड़ी जांच पर उनकी रिपोर्टिंग गलत थी। ट्रंप ने समर्थकों की भीड़ से कहा, 'मुझे नोबेल पुरस्कार नहीं मिला। मुझे पुलित्जर भी नहीं मिला। मुझे लेखन के लिए भी पुलित्जर पुरस्कार मिलना चाहिए था।'

गलत रिपोर्टिंग के लिए लोगों को मिला पुलित्जर-ट्रंप

उन्होंने आगे कहा, 'जिन लोगों को यह पुरस्कार मिला, उन्हें नहीं मिलना चाहिए था। आप जानते हैं, उन्हें रूस, रूस, रूस के मुद्दे पर उनकी सटीक और शानदार लेखनी के लिए पुलित्जर पुरस्कार दिया गया था। लेकिन उनकी रिपोर्टिंग गलत थी। उन सभी की रिपोर्टिंग गलत थी।' इसके बाद ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने की अपनी पुरानी शिकायत दोहराई। उन्होंने फिर दावा किया कि कई युद्धों को रुकवाने के लिए वह इस सम्मान के हकदार थे।

ट्रंप की ताजा टिप्पणी उनके उस सिलसिलेवार विरोध का एक और उदाहरण है, जिसमें वह बार-बार नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर नाराजगी जताते रहे हैं। अब उनका कहना है कि लेखन के क्षेत्र में भी वह पत्रकारिता के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक, पुलित्जर पुरस्कार के हकदार हैं।

सोशल मीडिया पर उड़ा ट्रंप का मजाक

पुलित्जर पुरस्कार के लिए ट्रंप के दावे पर सोशल मीडिया पर जल्द ही मजाक उड़ाया जाने लगा। कई यूजर्स ने उनकी लेखन क्षमता पर सवाल उठाए और पत्रकारों की आलोचना करने के उनके अंदाज का उपहास किया। एक यूजर ने लिखा, 'एक ऐसा व्यक्ति, जो बच्चों की किताब तक नहीं लिख सकता, सोचता है कि वह पुलित्जर पुरस्कार का हकदार है?' एक अन्य यूजर ने ट्रंप के बोलने के अंदाज पर निशाना साधते हुए लिखा, 'ट्रंप लेखन के लिए पुलित्जर चाहते हैं? यह शख्स अंग्रेजी भाषा के साथ ऐसा बर्ताव करता है, मानो उसे बंधक बना लिया हो। उसके वाक्यों को समझने के लिए तो किसी खोजी दल की जरूरत पड़ेगी।'

'ट्रंप का दिमाग गड़बड़ा गया है'

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अन्य यूजर ने लिखा, 'ऐसा लग रहा है, जैसे उनका मतलब ‘पुलित्जर’ कहना ही नहीं था। उस नारंगी रंग वाले सनकी का दिमाग पूरी तरह गड़बड़ा गया है और अपनी छवि बचाने की उसकी कोशिशें बेहद हास्यास्पद हैं।'

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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