गुरुग्राम : हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से गुरुग्राम में हालात बदतर होते जा रहे हैं। बिजली आपूर्ति में रुकावट के चलते शहर के कई इलाकों में लोग परेशान हैं। मीडिया खबरों के हवाले से महज 12 घंटे में बिजली कटौती से जुड़ी 3,000 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। कई जगहों पर बिजली संकट का असर पानी की सप्लाई पर भी पड़ा है। हालांकि, बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस दिए जाने के मामले में बिजली कर्मचारियों के साथ खड़े रहने की बात कही थी। लेकिन कोई पुख्ता आश्वासन नहीं मिलने के कारण लगातार तीसरे दिन हड़ताल जारी है।
जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात 10 बजे हड़ताल शुरू होने के बाद बिजली संबंधी शिकायतें आने लगीं। रात के दौरान करीब 945 शिकायतें दर्ज की गईं। इसके बाद सुबह के महज दो घंटे में 2,245 शिकायतें पहुंच गईं। इस तरह 12 घंटे के भीतर शिकायतों की संख्या 3,000 के पार हो गई। बिजली आपूर्ति बाधित होने से घरेलू कामकाज प्रभावित हुआ। वहीं, बिजली पर निर्भर पेयजल व्यवस्था में भी दिक्कतें आईं। ऐसे में लोगों को बिजली के साथ-साथ पानी की समस्या से भी जूझना पड़ा।
40 फीसदी हिस्से में बिजली प्रभावित होने का दावा
बिजली कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों के मुताबिक, गुरुग्राम के करीब 40 प्रतिशत हिस्से में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि, यह आंकड़ा यूनियन का दावा है। बिजली संकट के चलते कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की बात कही गई है।
निजीकरण के विरोध में कर्मचारी हड़ताल पर
बिजली कर्मचारी गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस दिए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह कदम बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में बढ़ाया जा रहा है। इसी के विरोध में हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले तीन दिन की हड़ताल बुलाई गई है।
यह हड़ताल 22 से 24 अक्टूबर तक प्रस्तावित है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार के सामने अपनी मांगें रखने के बावजूद समाधान नहीं निकल पाया, जिसके बाद आंदोलन का रास्ता चुना गया। कर्मचारी संगठनों ने संकेत दिया है कि मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में हड़ताल को अनिश्चितकालीन किया जा सकता है। 24 अक्टूबर को संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक में आगे की रणनीति तय किए जाने की बात कही गई है। फिलहाल बिजली आपूर्ति में आई बाधाओं को दूर करना चुनौती बना हुआ है। यदि हड़ताल जारी रहती है, तो बिजली और पानी की व्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री ने बिजली कर्मचारी यूनियनों से अपील की कि थी के वे हड़ताल का रास्ता न अपनाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हड़ताल की स्थिति में कोई असामाजिक तत्व अव्यवस्था फैलाने की कोशिश न करे, यह सुनिश्चित किया जाए।
