मादुरो पर कार्रवाई : UNSC की आपात बैठक में US के सहयोगी देशों ने की सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना, रूस ने कहा-यह अंतरराष्ट्रीय 'दबंगई'
- Edited by: आलोक कुमार राव
- Updated Jan 6, 2026, 08:35 AM IST
आलोचना करने वालों में अमेरिकी सहयोगियों में फ्रांस सबसे मुखर रहा। उप राजदूत जे धामराधिकारिकि ने कहा कि अमेरिका द्वारा मादुरो को हिरासत में लेना 'शांतिपूर्ण तरीके से विवादों के समाधान के सिद्धांत के खिलाफ है और बल प्रयोग न करने के सिद्धांत का भी उल्लंघन करता है।'
वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर यूएनएससी की आपात बैठक। तस्वीर-AP
Maduro seizure : वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपने कब्जे में लेने पर अमेरिका चौतरफा घिरता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक में कई देशों ने उसकी सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। खास बात यह है कि यूएस की निंदा करने वालों में उसके सहयोगी देश भी शामिल हैं। हालांकि, कई देशों ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का यह कहते हुए समर्थन किया कि मादुरो एक अवैध एवं दमनकारी नेता हैं। मादुरो के पकड़े जाने के खिलाफ दुनिया के कई देशों में विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
लेकिन कई देशों ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताते हुए इसकी निंदा भी की और वेनेजुएला के लोगों की इच्छा को प्रतिबिंबित करने वाले लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन की मांग की। अमेरिकी सहयोगियों में फ्रांस सबसे मुखर रहा। उप राजदूत जे धामराधिकारिकि ने कहा कि अमेरिका द्वारा मादुरो को हिरासत में लेना 'शांतिपूर्ण तरीके से विवादों के समाधान के सिद्धांत के खिलाफ है और बल प्रयोग न करने के सिद्धांत का भी उल्लंघन करता है।'
डेनमार्क की उप–संयुक्त राष्ट्र राजदूत सैंड्रा जेनसन लांडी ने अपने देश की ओर से मौजूदा हालात पर 'गहरी चिंता' जताई और कहा, 'ये घटनाक्रम एक खतरनाक मिसाल हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान किया जाना चाहिए।'
फ्रांस और डेनमार्क ने की आलोचना
फ्रांस और डेनमार्क के ये दोनों बयान यूरोपीय देशों की आलोचना में स्पष्ट सख्ती को दर्शाते हैं, जबकि शुरुआत में कई यूरोपीय संघ के सदस्य देशों का रुख अस्पष्ट था। इसके विपरीत, संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन और ग्रीस के राजनयिकों ने अमेरिकी सैन्य अभियान की निंदा नहीं की। पनामा के राजदूत एलोय अल्फारो डी अल्बा ने विपक्ष को शामिल किए बिना और नए चुनाव कराए बिना मौजूदा शासन के साथ काम करने की अमेरिकी योजना पर चिंता जताई।
कोलंबिया ने की यूएस की निंदा
उन्होंने परिषद से कहा, 'दमनकारी तंत्र से जुड़ी किसी शख्सियत, जैसे डेल्सी रोड्रिगेज, के नेतृत्व में स्थायी सरकार स्थापित करने का कोई भी प्रयास व्यवस्था की निरंतरता होगा, न कि वास्तविक संक्रमण।' कोलंबिया की राजदूत लियोनोर ज़ालाबाटा टोरेस ने कहा कि किसी आक्रामक कार्रवाई को अंजाम देने के लिए एकतरफा बल प्रयोग का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'ऐसी कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन हैं।'
रूस ने सैन्य कार्रवाई को 'अंतरराष्ट्रीय गुंडागर्दी' बताया
रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने अमेरिका पर 'अंतरराष्ट्रीय गुंडागर्दी' और 'नव–औपनिवेशिकता व साम्राज्यवाद' का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 'बल प्रयोग के जरिए अमेरिकी वर्चस्व' का कोई औचित्य नहीं है और ट्रंप की आलोचना न करने पर अमेरिकी सहयोगियों पर पाखंड और दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
हम अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं-चीन
चीन के कार्यवाहक राजदूत सुन लेई ने कहा कि बीजिंग अमेरिका की इन कार्रवाइयों से 'अत्यंत स्तब्ध है और इसकी कड़ी निंदा करता है।' उन्होंने इसे अमेरिका के 'एकतरफा, अवैध और दबंग कदम' करार दिया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस की ओर से पढ़े गए एक बयान में कहा गया कि वे अमेरिकी कार्रवाई के दौरान 'अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का पालन न किए जाने' को लेकर अब भी 'गंभीर रूप से चिंतित' हैं। उन्होंने कहा, 'कानून की शक्ति को ही सर्वोपरि होना चाहिए।'
ब्रिटेन ने दिया संक्षिप्त बयान
इसके विपरीत, ब्रिटेन के कार्यवाहक राजदूत जेम्स कारियुकी ने बेहद संक्षिप्त बयान देते हुए केवल इतना कहा कि ब्रिटेन वेनेजुएला में 'सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से ऐसी वैध सरकार में परिवर्तन' देखना चाहता है, जो वेनेजुएला के लोगों की इच्छा को प्रतिबिंबित करे।