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Donald Trump Assassination Attempt: सीक्रेट सर्विस ने जानबूझकर नहीं बढ़ाई थी ट्रंप की सुरक्षा! केस में बड़ा खुलासा

Donald Trump Assassination Attempt: डोनाल्ड ट्रंप पर हमले के तुरंत बाद सीक्रेट सर्विस ने इस बात से इनकार किया था कि उसने सुरक्षा बढ़ाने संबंधी अनुरोधों को अस्वीकार किया था। अब सीक्रेट सर्विस ने माना है कि उसने ट्रंप के कार्यक्रमों में सुरक्षा बढ़ाने संबंधी उनके प्रचार अभियान दल के कुछ अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया था।

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Gunfire at Donald Trump rally

Photo : AP

Donald Trump Assassination Attempt: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने स्वीकार किया है कि उसने राष्ट्रपति चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के कार्यक्रमों में सुरक्षा बढ़ाने संबंधी उनके प्रचार अभियान दल के कुछ अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया था। जिसके बाद 13 जुलाई को एक चुनावी रैली में उनपर गोली चलाई गई।

बता दें, अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में 13 जुलाई को एक चुनावी रैली के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप (78) पर एक बंदूकधारी ने कई गोलियां चलाई थीं। इस हमले में एक गोली ट्रंप के दाहिने कान को छूकर निकल गई थी, जबकि रैली में शामिल एक व्यक्ति मारा गया था और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। खुफिया सेवा के एक सदस्य ने हमलावर को घटनास्थल पर ही मार गिराया था।

सीक्रेट सर्विस ने पहली किया था इंकार

इस हमले के तुरंत बाद, कानून प्रवर्तन एजेंसी ने इस बात से इनकार किया था कि उसने सुरक्षा बढ़ाने संबंधी अनुरोधों को अस्वीकार किया था। लेकिन सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप की हत्या के प्रयास के एक सप्ताह बाद, शनिवार देर रात स्वीकार किया कि उसने पूर्व राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में सुरक्षा बढ़ाने के कुछ अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया था। एजेंसी के मुख्य प्रवक्ता एंथनी गुगलिमी ने शनिवार देर रात द वाशिंगटन पोस्ट को जारी एक बयान में कहा, सीक्रेट सर्विस का मिशन जटिल है। हर दिन हम एक खतरे वाले माहौल में काम करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे लोग कई आयोजनों, यात्राओं और अन्य चुनौतीपूर्ण माहौल में सुरक्षित रहें।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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