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सीजफायर के लिए ट्रंप ने पुतिन पर बढ़ाया दबाव, रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध

अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते हैं कि रूस सीजफायर के लिए तैयार हो। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह कदम बुडापेस्ट में पुतिन के साथ होने वाली मुलाकात रद्द होने के बाद उठाया है। बता दें कि ट्रंप ने पिछले हफ्ते हंगरी के बुडापेस्ट में पुतिन से मुलाकात की घोषणा की थी, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच सोमवार को हुई बातचीत के बाद यह प्लान रुक गया।

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रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों पर अमेरिका ने लगाया प्रतिबंध। तस्वीर-AP

Photo : AP

US sanctions 2 major Russian Oil companies : यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन पर दबाव और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट एवं लुकोइल पर प्रतिबंध लगाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति चाहते हैं कि रूस सीजफायर के लिए तैयार हो। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह कदम बुडापेस्ट में पुतिन के साथ होने वाली मुलाकात रद्द होने के बाद उठाया है। बता दें कि ट्रंप ने पिछले हफ्ते हंगरी के बुडापेस्ट में पुतिन से मुलाकात की घोषणा की थी, लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच सोमवार को हुई बातचीत के बाद यह प्लान रुक गया।

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक बयान में कहा, 'राष्ट्रपति पुतिन द्वारा इस बेवजह युद्ध को समाप्त करने से इनकार के मद्देनजर, ट्रेजरी रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रहा है, जो क्रेमलिन की युद्ध मशीन को वित्तपोषित करती हैं। हम अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे भी हमारे साथ इन प्रतिबंधों में शामिल हों और उनका पालन करें।'

प्रतिबंध ट्रंप प्रशासन की नीतिगत बदलाव का संकेत

ये प्रतिबंध ट्रंप प्रशासन की बड़ी नीतिगत बदलाव का संकेत हैं, क्योंकि इससे पहले ट्रंप ने युद्ध के चलते रूस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया था और इसके बजाय व्यापारिक कदमों पर भरोसा किया था। भारत द्वारा सस्ते रूसी तेल की खरीद के जवाब में ट्रंप ने भारत से आने वाले सामानों पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था। संयुक्त राज्य अमेरिका ने चीन पर ऐसे शुल्क नहीं लगाए हैं, जबकि वह भी रूसी तेल का एक बड़ा खरीदार है। रूस के आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए 60 डॉलर प्रति बैरल की तेल मूल्य सीमा के चलते रूस के तेल खरीदार हाल के वर्षों में यूरोप से एशिया की ओर स्थानांतरित हो गए हैं।

पुतिन के साथ हंगरी की बैठक रद्द की

बुधवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हंगरी में पुतिन के साथ होने वाले नियोजित शिखर सम्मेलन को रद्द कर दिया है क्योंकि उन्हें लगा कि यह सही समय नहीं है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि रूसी तेल कंपनियों पर लगाए गए ये प्रतिबंध ज्यादा समय तक लागू नहीं रहेंगे। उन्होंने पिछले साल कहा था कि वे आमतौर पर प्रतिबंधों को जल्दी हटा देते हैं, क्योंकि ये उपाय वैश्विक तेल लेनदेन में डॉलर के प्रभुत्व के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। रूस अक्सर अन्य मुद्राओं में भुगतान की मांग करता रहा है।

एक्सपर्ट बोले-देरी से उठाया गया कदम

ट्रंप का बुधवार का यह कदम ब्रिटेन द्वारा पिछले हफ्ते रोसनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद आया है। विश्लेषकों ने कहा कि ये कदम बड़ा है, लेकिन बहुत देर से उठाया गया है। कोलंबिया विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शोध विद्वान और अमेरिका के पूर्व अधिकारी एडवर्ड फिशमैन ने कहा-'यह सिर्फ एक बार करके खत्म नहीं हो सकता'। उन्होंने कहा कि अब सवाल यह होगा कि क्या अमेरिका रोसनेफ्ट और लुकोइल के साथ कारोबार करने वालों पर भी प्रतिबंध की धमकी देगा।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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