Israel Lebanon Peace Talks: मध्य पूर्व (Middle East) में लंबे समय से जारी संघर्ष और तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति सामने आई है। इजरायल और लेबनान के बीच स्थायी शांति स्थापित करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता में कूटनीतिक बातचीत का पांचवां दौर वॉशिंगटन डीसी में आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि इन वार्ताओं का मुख्य और दीर्घकालिक लक्ष्य क्षेत्र में दशकों से जारी हिंसा के चक्र को हमेशा के लिए खत्म करना है। अमेरिका दोनों देशों को दो संप्रभु राष्ट्रों के रूप में एक मेज पर लाने और शांति व सुरक्षा का ठोस रास्ता तलाशने में मदद कर रहा है।
दो स्तरों पर तैयार किया गया है वार्ता का मसौदा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पांचवें दौर की वार्ता का मसौदा पिछले चरणों की तरह ही बेहद रणनीतिक रखा गया है, जिसके तहत मुख्य रूप से दो स्तरों- राजनीतिक और सैन्य स्तर पर गहन चर्चा की जा रही है:
1. राजनीतिक स्तर (Political Tier)
राजनीतिक स्तर पर वार्ता का मुख्य लक्ष्य इजरायल और लेबनान के पारस्परिक संबंधों को स्थिर करना और उन्हें सामान्य बनाना है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच इस समय कोई भी औपचारिक राजनयिक (Diplomatic) संबंध नहीं हैं। तकनीकी रूप से दोनों देश आज भी युद्ध की स्थिति में हैं। इस वार्ता के जरिए भविष्य में आधिकारिक कूटनीतिक रिश्ते स्थापित करने की जमीन तैयार की जा रही है।
2. सैन्य स्तर (Military Tier)
सैन्य स्तर की बातचीत का उद्देश्य दोनों देशों की सीमाओं, विशेषकर 'ब्लू लाइन' (Blue Line) पर जारी तनाव को कम करना है। वार्ता का तात्कालिक लक्ष्य किसी भी तरह के सीधे सैन्य टकराव को रोकना और संघर्ष के विस्तार के जोखिम को घटाना है, ताकि यह सीमाई विवाद किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) का रूप न ले ले।
सीमा विवाद और सुरक्षा गारंटी पर टिकी हैं निगाहें
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देश सुरक्षा गारंटी और समुद्री व जमीनी सीमा विवादों पर कितनी सहमति बना पाते हैं। अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिक इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं ताकि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई को पाटा जा सके।
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब पूरे मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। यदि वॉशिंगटन में चल रही यह बातचीत किसी ठोस नतीजे पर पहुंचती है, तो यह न केवल इजरायल और लेबनान के लिए, बल्कि पूरे वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होगी।
