US Iran War: मिडल-ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमलों की शुरुआत करते हुए कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि यह कार्रवाई 'आत्मरक्षा' के तहत की गई है और इसे ईरान की ओर से की गई कथित आक्रामक गतिविधियों के जवाब में अंजाम दिया गया है। इधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों पक्षों से बातचीत की टेबल पर लौटने की गुहार लगाई है।
CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी बलों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के निर्देश पर ईरान के कई ठिकानों पर हमले शुरू किए हैं। ईरानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार तेहरान, फार्स, बंदर अब्बास, सीरिक, मिनाब, केश्म आइलैंड और इस्फहान सहित कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इस्फहान को ईरान के अहम औद्योगिक और सैन्य केंद्रों में गिना जाता है, जिससे इस हमले को रणनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।
ट्रम्प बोले, ईरान को कड़ा जवाब दिया
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते तो पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को 'कड़ा जवाब' दिया है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ (Pete Hegseth) ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी हितों या सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रहे तो ईरान के सैन्य ढांचे और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को और निशाना बनाया जा सकता है।
ईरान का दावा होर्मुज स्ट्रेस सभी के लिए बंद
इस बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी प्रकार के जहाजों, तेल टैंकरों और वाणिज्यिक पोतों के लिए तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। ईरान की ओर से चेतावनी दी गई कि जलमार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर हमला किया जा सकता है। हालांकि, अमेरिकी CENTCOM ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा है कि जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
होर्मुज बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा गंभीर असर
जानकारों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट विश्व के लगभग पांचवें हिस्से के तेल परिवहन का प्रमुख मार्ग है। ऐसे में अगर यह मार्ग वास्तव में बंद होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और समुद्री व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे मध्य पूर्व को नई अनिश्चितता में धकेल दिया है। संयुक्त राष्ट्र और कई क्षेत्रीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्र में तनाव फिलहाल कम होने वाला नहीं है।
