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US-Iran जंग में ब्रिटेन की एंट्री! कीर स्टार्मर सरकार ने अमेरिका को दी सैन्य बेस इस्तेमाल की इजाजत; आग बबूला हुआ ईरान

US-Iran War: अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ब्रिटेन ने भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। कीर स्टार्मर सरकार का कहना है कि यह कदम “सामूहिक आत्मरक्षा” के तहत उठाया गया है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते खतरे को देखते हुए। वहीं ईरान ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि ब्रिटेन का यह कदम क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकता है और ईरान अपने आत्मरक्षा के अधिकार का पूरा इस्तेमाल करेगा।

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ब्रिटेन ने अमेरिका को दिया अपना सैन्य बेस इस्तेमाल करने की इजाजत।

US-Iran War: अमेरिका-ईरान जंग में ब्रिटेन की भी एंट्री हो चुकी है। दरअसल, कीर स्टार्मर सरकार ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है, ताकि ईरान के उन मिसाइल ठिकानों पर कार्रवाई की जा सके जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जहाजों को निशाना बना रहे हैं।

ब्रिटेन ने क्या कहा?

डाउनिंग स्ट्रीट के अनुसार, शुक्रवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में ईरान के साथ बढ़ते तनाव और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में व्यवधान पर विस्तार से चर्चा की गई। ब्रिटेन सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कदम “सामूहिक आत्मरक्षा” के तहत उठाया गया है और इसमें अमेरिका के रक्षात्मक अभियानों को भी शामिल किया गया है।

पीएम कीर स्टार्मर ने कहा कि अमेरिका आरएएफ फेयरफोर्ड और हिंद महासागर में स्थित अमेरिकी-ब्रिटेन संयुक्त सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया का इस्तेमाल कर सकता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष शुरू होने के बाद से ही पीएम स्टार्मर पर बार-बार हमला किया है और शिकायत की कि वे उनकी मदद के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं।

ईरान ने क्या दी चेतावनी?

हालांकि, ब्रिटेन के इस फैसले पर ईरान ने नाराजगी जाहिर की। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची (Seyed Abbas Araghchi) ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन की अधिकांश जनता इस संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहती, लेकिन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने उनकी भावनाओं की अनदेखी करते हुए ऐसा कदम उठाया है, जिससे ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान अपने आत्मरक्षा के अधिकार का पूरा उपयोग करेगा।

ट्रंप ने की थी नाटो की आलोचना

हाल ही में ट्रंप ने नाटो (NATO) आलोचना करते हुए उसे एक 'कागजी शेर' बताया था, जो मदद के लिए अमेरिका पर निर्भर है। उन्होंने NATO सदस्यों पर कायरता का आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में मदद नहीं की और न ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज' को फिर से खोलने में सहायता की।

जैसे-जैसे मध्य-पूर्व क्षेत्र में युद्ध बढ़ रहा है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को NATO पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इस गठबंधन को 'कागज़ी शेर' बताया और कहा कि अमेरिका के बिना उनकी 'कोई हैसियत नहीं' है। 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने NATO की इसलिए कड़ी आलोचना की कि उसनेईरान के खिलाफ लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया और न ही 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को फिर से खोलने में कोई मदद की; साथ ही उन्होंने इन सहयोगी देशों को 'कायर'करार दिया।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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