India US Relation: अमेरिकी विदेश वभाग के अधिकारियों ने माना है कि पिछले कुछ समय में भारत और अमेरिका के रिश्ते में 'हिचकोले' आए हैं, बावजूद इसके दोनों देशों के आपसी संबंध 'एक सकारात्मक रास्ते' पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप द्वारा सार्वजनिक रूप से निराशा जाहिर करने के बाद भी भारतीय-अमेरिकी संबंध पटरी से उतरे नहीं हैं।
प्रतिबंध और तारीफ दोनों को कैसे देखा जाए-ANI
दरअसल, समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्रंप अधिकारियों से सवाल किया कि एक तरफ विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत के साथ भागीदारी के रणनीतिक महत्व पर जोर दे रहे हैं तो दूसरी तरफ नई दिल्ली पर कारोबारी प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ उसके नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना की जा रही है, इसे कैसे देखा जाए।
भारत को साझेदार के रूप में देखता है US
इस सवाल पर अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि देशों के साथ राष्ट्रपति ट्रंप जब निराश होते हैं तो वह अपनी बात कहने में झिझकते नहीं हैं। आप इसे उनके सोशल मीडिया अकाउंट ट्रूथ सोशल पर देख सकते हैं। अमेरिकी इतिहास में अब तक का यह सबसे पारदर्शी प्रशासन है। हालांकि, ट्रंप के इस साफगोई वाले अंदाज के बावजूद ट्रंप प्रशासन मानता है कि भारत अब भी उनका अच्छा दोस्त और सहयोगी है और वह आगे भी अमेरिका का साझेदार बना रहेगा।
न्यूयॉर्क में जयशंकर से मिले रूबियो
सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने न्यूयॉर्क में अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से मुलाकात की। संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर हुई यह बैठक इस गर्मी की शुरुआत में भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ के बाद व्यापार तनाव पैदा होने के बाद पहली आमने-सामने की बैठक थी। दोनों ने एक-दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों सरकारें बढ़ती आर्थिक परेशानियों के बावजूद निरंतरता का संदेश दिया।
भारत को बताया अमेरिका के लिए अहम
विदेश विभाग के एक बयान के अनुसार, रूबियो ने कहा, भारत संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण देश है। उन्होंने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में नई दिल्ली की भागीदारी की प्रशंसा की और क्वाड के माध्यम से एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करना जारी रखने का संकल्प लिया।
