अमेरिकी सेना ने घोषणा की है कि वह 20 सदस्यों वाली एक टास्क फोर्स बनाएगी। इसका काम ईरान जाने वाले उन ज़मीनी रास्तों को बाधित करने के तरीके खोजना होगा, जिनका इस्तेमाल हथियारों और अवैध सामान की तस्करी के लिए किया जाता है। ये पाबंदियां, दोनों देशों के बीच आठ महीने तक चले युद्ध के दौरान ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का ही विस्तार होंगी।
इस युद्ध के दौरान तेहरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़' (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग से आवाजाही को भी सीमित कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ठप हो गई थी।
शनिवार को 'X' पर जारी एक बयान में, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि यह टास्क फोर्स ईरान की उन क्षमताओं को और सीमित कर देगी, जिनका इस्तेमाल वह आतंकवाद को फंड देने, हथियारों की फैक्ट्रियों को फिर से बनाने और अपनी सेना को मजबूत करने के लिए करता है।
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टीम में नागरिक और सैन्य, दोनों तरह के कर्मी शामिल होंगे
बयान में आगे कहा गया है कि फ्लोरिडा स्थित इस टीम में नागरिक और सैन्य, दोनों तरह के कर्मी शामिल होंगे। यह टीम अमेरिकी सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि 'ईरान की ज़मीनी सीमाओं और कैस्पियन सागर के रास्ते आधुनिक हथियार प्रणालियों, दोहरे उपयोग वाली तकनीकों (dual-use technologies), प्रतिबंधित सामग्रियों और अवैध कमाई के स्रोतों की आवाजाही को रोका जा सके।'
तो अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी कर दी थी
युद्ध की शुरुआत में ही, जब तेहरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़' से होने वाली आवाजाही को सीमित करने की कोशिश की, तो अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी कर दी थी। बता दें कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस नाकेबंदी की वजह से ईरान से होने वाले लगभग 25 अरब डॉलर के कच्चे तेल (crude oil) का निर्यात रुक गया है।
