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सीरिया से भागने के बाद अल-असद की पत्नी अस्मा को भी लग सकता है बड़ा झटका, नागरिकता रद्द कर सकती है ब्रिटेन सरकार

Basar Al Assad Wife: विदेश सचिव डेविड लैमी ने कहा कि अस्मा असद एक प्रतिबंधित व्यक्ति हैं और यूके में उनका स्वागत नहीं किया जाएगा। लेकिन अभी भी इस बात पर कोई निर्णय नहीं हुआ है कि अस्मा असद की ब्रिटिश नागरिकता रद्द की जाएगी या नहीं।

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बशर अल-असद अपनी पत्नी अस्मा असद के साथ।

Photo : Twitter

Basar Al Assad Wife: सीरिया में हुए हालिया घटनाक्रम ने राष्ट्रपति बशर अल-असद व उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है। उन्हें न केवल सत्ता से बाहर होना पड़ा, बल्कि हालात ऐसे हो गए कि असद परिवार को देश छोड़ने के लिए भी मजबूर होना पड़ा, उन्हें रूस ने शरण दी है। अब खबर आई है कि यूके सरकार बशर अल-असद की ब्रिटिश पत्नी अस्मा असद की नागरिकता रद्द कर सकती है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन ब्रिटेन ने उन्हें प्रतिबंधित व्यक्ति करार दिया है।

ब्रिटेन के विदेश सचिव डेविड लैमी के अनुसार, अपदस्थ सीरियाई नेता बशर अल-असद की ब्रिटिश पत्नी अस्मा असद को 'प्रतिबंधित व्यक्ति' करार दिया गया है और यूके में उनका स्वागत किया जाएगा। उनकी यह टिप्पणी इस बात को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच आई है कि क्या ब्रिटिश सरकार उनकी नागरिकता रद्द करेगी।

नागरिकता को लेकर हो सकता है विचार

हाउस ऑफ़ कॉमन्स में सवालों के जवाब में, लैमी ने कहा कि अस्मा असद की स्थिति पर यूके सरकार नजर रख रही है। उन्होंने कहा, वह एक प्रतिबंधित व्यक्ति हैं और यूके में उनका स्वागत नहीं किया जाएगा। विदेश सचिव ने यह स्पष्ट कर दिया कि यूके में असद परिवार की उपस्थिति स्वागत योग्य नहीं है, लेकिन अभी भी इस बात पर कोई निर्णय नहीं हुआ है कि अस्मा असद की ब्रिटिश नागरिकता रद्द की जाएगी या नहीं। इससे पहले सोमवार को डची ऑफ़ लैंकेस्टर के चांसलर पैट मैकफैडेन ने बताया था कि सरकार को अस्मा असद या उनके प्रतिनिधियों से यूके में उनकी संभावित वापसी के बारे में कोई संपर्क या कोई अनुरोध नहीं मिला है।

लंदन में हुआ था जन्म

बशर अल-असद की पत्नी अस्मा असद का 1975 में लंदन में जन्म हुआ था। उनकी परवरिश और शिक्षा यूके में ही हुई। सीरिया में तख्तापलट के बाद वह अपने पति बशर अल-असद के साथ मास्को में हैं। बता दें, रविवार को विद्रोही समूहों ने दमिश्क पर कब्ज़ा कर लिया, जो सीरिया के लंबे समय से चल रहे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण क्षण था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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