Authored by- Munish Devgan: 6 फरवरी 2023, तुर्की में सुबह तकरीबन 4 बजे 7.8 पैमाने का भूकंप आया। यह रहा तो चंद सेंकड ही, लेकिन तबाही ऐसा मचा गया है कि लाशें अभी तक गिनती नहीं की जा सकी है।
तुर्की और सीरिया के भूकंप के जरिए कुदरत ने इंसान को उसकी औकात बता दी है। हर उस इंसान को जो चांद पर, स्पेस पर बसने के ख्वाब देखता है। कुदरत ने बताया कि इंसानों धरती की कद्र करके पहले धरती पर बसना सीख लो, फिर चांद पर प्लाट खऱीद लेना।
तुर्की में आशियाने ताश के पत्तों की तरह ढह गए। शहर कब्रिस्तान बन गए। जब तक धरती का गुस्सा शांत हुआ तो पीछे बस मौत, मातम और मलबा ही बचा था। भारत ने ऑपरेशन दोस्त के तहत तुर्की में दुनिया की सबसे पहली मदद भेजी। भारतीय मदद की तारीफ तुर्की ने की है।
इस भूकंप ने बता दिया है कि अगर प्रकृति से खिलवाड़ बंद नहीं हुआ तो कहीं भी तबाही मच सकती है। दुनिया के किसी भी कोने में और किसी भी वक्त। कोई भी इंसान इसे नहीं रोक सकता है। भारत में भी कई शहर कुछ ऐसे ही मुहाने पर खड़े हैं। उत्तराखंड का जोशीमठ इसी का एक उदाहरण है।
