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कौन हैं तुलसी गबार्ड? डोनाल्ड ट्रंप की टीम में पहली हिंदू महिला, जिसे मिली अहम जिम्मेदारी

Who is Tulsi Gabbard: तुलसी गबार्ड 2013 से 2021 तक डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य के रूप में काम कर चुकी हैं। 2022 में उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ दी और बाइडेन की कट्टर आलोचक बन गईं। अब डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) नियुक्त किया है।

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तुलसी गबार्ड।

Photo : AP

Who is Tulsi Gabbard: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी नई टीम बना रहे हैं। ट्रंप 2.0 प्रशासन में कई चौंकाने वाले नाम हैं। इनमें से एक तुलसी गबार्ड भी हैं, जिन्हें डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका का राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) नियुक्त किया है। ट्रंप प्रशासन में इस अहम जिम्मेदारी को संभालने वाली वह पहली हिंदू महिला हैं। तुलसी गबार्ड को राष्ट्रीय खुफिया निदेशक नियुक्त करते हुए ट्रंप ने कहा, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि पूर्व सांसद लेफ्टिनेंट कर्नल तुलसी गबार्ड राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के रूप में सेवा करेंगी।

ट्रंप ने कहा, तुलसी ने सभी अमेरिकियों की स्वतंत्रता के लिए दो दशकों से अधिक समय तक संघरृश किया है। वह एक पूर्व डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार भी रही हैं और अब वह एक रिपब्लिकन हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि तुलसी अपनी निर्भीक भावना से हमारे संवैधानिक अधिकारों का समर्थन करेंगी और शक्ति के माध्यम से शांति की रक्षा करेंगी।

जानिए कौन हैं तुलसी गबार्ड?

तुलसी गबार्ड 2013 से 2021 तक डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य के रूप में काम कर चुकी हैं। 2020 में उन्होंने डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी पेश की थी। हालांकि, बाइडन की जीत के बाद उन्होंने उनका समर्थन किया। 2022 में उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ दी और बाइडेन की कट्टर आलोचक बन गईं। 2022 में ही उन्होंने इंडिपेंडेंट चुनाव भी लड़ा था। वह, ट्रंप की संभावित उप-राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में भी देखी जा रही थीं।

भारत से क्या रिश्ता?

तुलसी गबार्ड को अक्सर उनके नाम की वजह से भारतीय समझ लिया जाता है, लेकिन यह सही नहीं है। उनका भारत से कोई संबंध नहीं है। हालांकि, तुलसी गबार्ड की मां ने हिंदू धर्म अपना लिया था और अपने सभी बच्चों के नाम हिंदू रखे थे। तुलसी गबार्ड भी खुद को हिंदू मानती हैं और वह पहली हिंदू अमेरिकी कांग्रेसवुमन थीं। वह अमेरिकी समोआ मूल की हैं, लेकिन तुलसी ने भगवत गीता पर हाथ रखकर पद की शपथ ली थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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