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श्रीलंका में अब सांसदों को नहीं मिलेगी पेंशन;एनपीपी सरकार ने खत्म किया 1977 का पेंशन कानून;भारत में ऐसा कब होगा?

श्रीलंका में संसद सदस्य पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन के हकदार होते थे, लेकिन अब उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा।

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श्रीलंका में अब सांसदों की पेंशन बंद।

श्रीलंका में अब सांसदों को कार्यकाल पूरा होने के बाद पेंशन नहीं मिला करेगी। इसे लेकर श्रीलंका सरकार ने संसदीय पेशन (निरसन) अधिनियम को राजपत्रित कर दिया है। बीते मंगलवार को ही यह अधिनियम संसद से भारी बहुमत से पारित हो गया था। गौरतलब है कि राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके जब सत्ता में आए थे, तब उन्होंने जनता से ये वादा किया था कि वे सांसदों की पेंशन खत्म करेंगे। अब वही वादा पूरा किया गया है। भारत में भी सांसदों को पद पर रहते हुए तनख्वाह और पद से हटने के बाद पेंशन दी जाती है। इसके अतिरिक्त उन्हें कई भत्ते भी मिलते हैं।

अब नहीं मिलेगी पेंशन

श्रीलंका में संसद सदस्य पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन के हकदार होते थे। उन्हें यह लाभ संसदीय पेंशन कानून संख्या 1,1977 के तहत मिलता था, लेकिन अब जबकि नया अधिनियम पारित और राजपत्रित हो गया है ऐसे में उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा।

1977 का पेंशन कानून निरस्त

एनपीपी सरकार ने 1977 के पेंशन कानून को निरस्त करने का कदम उठाया है। कई सांसदों ने इसका व्यापक विरोध किया था। जिसके बाद यह मामला देश की सर्वोच्च न्यायालय में भी पहुंचा। जहां 6 फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्धारित किया था कि संसदीय पेंशन (निरसन) विधेयक संसद में साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है। जिसके बाद मंगलवार को 225 सदस्यीय संसद में इस पर मतदान हुआ, जहां सांसदो ने 154 वोटों से इसे पारित कर दिया। दो सांसदों ने इसका विरोध किया। वहीं 69 सांसदो ने मतदान में भाग नहीं लिया।

क्या था विधेयक का उद्देश्य

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य संसदीय पेंशन कानून संख्या 1, 1977 को निरस्त करना था, जिसके तहत संसद सदस्य रह चुके व्यक्तियों को बिना अंशदान के आजीवन पेंशन प्रदान की जाती थी। इस कदम से पूर्व सांसदों में आक्रोश फैल गया,जिन्होंने इसे गैरकानूनी घोषित कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग की,लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

एनपीपी सरकार ने 1977 के पेंशन कानून को निरस्त करने का कदम उठाया है,जो कि उसके लोकप्रिय सुधारवादी चुनावी वादों में से एक है। सरकार का कहना है कि यह अनुचित राजनीतिक लाभ है, जो सांसदों को दिया जाता रहा है। ऐसे में अब इस प्रकार की बचत का उपयोग अन्य आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाएगा। राजपत्र जारी होने के साथ ही सांसदों को पेंशन का भुगतान बंद हो जाएगा।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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