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Ganesh Chaturthi Special: इस झील को मानते हैं गणेश जी का जन्मस्थान, पहुंचने के लिए करना पड़ता है 21 किमी का ट्रेक

डोडीताल कोई ऐसा पर्यटन स्थल नहीं है जहां गाड़ी सीधे झील के किनारे पहुंच जाए। यहां जाने के लिए ट्रेक करना पड़ता है।

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एक बार जरूर घमें भगवान गणेश का जन्मस्थान

Ganesh Chaturthi Travel Destination: उत्तराखंड को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां पहाड़ों के बीच कई ऐसी जगहें हैं, जिनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं सदियों से लोगों को अपनी ओर खींचती रही हैं। इन्हीं में से एक है डोडीताल, उत्तरकाशी जिले में स्थित एक खूबसूरत मीठे पानी की झील। शांत पहाड़ों के बीच मौजूद यह झील सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए नहीं जानी जाती। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म इसी जगह हुआ था।

झील के किनारे है गणेश मंदिर

डोडीताल समुद्र तल से करीब 3000 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर स्थित है। झील के एक किनारे भगवान गणेश को समर्पित मंदिर भी है। स्थानीय मान्यता में गणेश जी को यहां डोडी राजा के नाम से भी जोड़ा जाता है। यही वजह है कि इस जगह का धार्मिक महत्व बाकी प्राकृतिक स्थलों से अलग हो जाता है।

झील तक पहुंचना भी अपने आप में अनुभव है

डोडीताल कोई ऐसा पर्यटन स्थल नहीं है जहां गाड़ी सीधे झील के किनारे पहुंच जाए। यहां जाने के लिए ट्रेक करना पड़ता है। पारंपरिक मार्ग संगमचट्टी से शुरू होता है और करीब 21 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद डोडीताल पहुंचा जाता है। यही वजह है कि यहां पहुंचने का अनुभव किसी सामान्य पर्यटन स्थल से बिल्कुल अलग होता है। रास्ते में पहाड़, जंगल और हिमालयी प्रकृति लगातार साथ चलती है।

डोडीताल से निकलती है असी गंगा

इस झील की एक और खास बात है। डोडीताल से निकलने वाली धारा आगे चलकर असी गंगा के रूप में बहती है और गंगोरी के पास भागीरथी नदी में मिलती है। यानी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ यह झील क्षेत्र की जल व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका रखती है। डोडीताल के आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसे ट्रेकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षक बनाता है।

बेहद खूबसूरत है डोडीताल झील (Photo: Uttarakhand Tourism)

बेहद खूबसूरत है डोडीताल झील (Photo: Uttarakhand Tourism)

क्यों माना जाता है इसे गणेश जी का जन्मस्थान?

स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार, कैलासू क्षेत्र का संबंध भगवान गणेश की कथा से रहा है। यहां प्रचलित कथाओं में डोडीताल को गणेश जी के जन्म से जोड़ा जाता है। कुछ स्थानीय परंपराएं यह भी मानती हैं कि भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी हिमालय की कई पौराणिक घटनाओं का संबंध इसी क्षेत्र से रहा है। यही लोकविश्वास डोडीताल को श्रद्धालुओं के लिए खास बनाता है।

हिंदू परंपरा में भगवान गणेश के जन्म की कथा अलग-अलग रूपों में सुनाई जाती है। सबसे प्रचलित कथा में माता पार्वती द्वारा गणेश को अपने शरीर के उबटन से बनाने और बाद में भगवान शिव द्वारा उनका सिर काटने का प्रसंग आता है। डोडीताल की स्थानीय मान्यता इसी व्यापक गणेश कथा को इस हिमालयी क्षेत्र से जोड़ती है।

गणेश चतुर्थी पर बढ़ जाता है महत्व

गणेश चतुर्थी के समय डोडीताल से जुड़ी यह मान्यता और भी चर्चा में आ जाती है। स्थानीय लोग इस अवसर को श्रद्धा के साथ मनाते हैं और गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। कई स्थानीय लोगों की इच्छा रही है कि डोडीताल को गणेश जी के जन्मस्थान से जुड़ी धार्मिक पर्यटन की पहचान मिले, ताकि ज्यादा लोग इस जगह के बारे में जान सकें।

डोडीताल की खासियत यही है कि यहां प्रकृति और आस्था एक-दूसरे से अलग नहीं दिखते। एक तरफ शांत झील है, चारों तरफ पहाड़ और जंगल हैं, तो दूसरी तरफ भगवान गणेश से जुड़ी लोकमान्यता। इतिहास इस मान्यता की पुष्टि करे या न करे, लेकिन स्थानीय लोगों की आस्था ने डोडीताल को एक ऐसी जगह बना दिया है, जहां गणेश चतुर्थी के मौके पर श्रद्धालुओं के लिए पहाड़ों के बीच भगवान गणेश की एक अलग ही तस्वीर उभरती है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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