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Pakistan पहुंचा Russian Oil: क्या चीन के कहने पर पुतिन ने कराची पहुंचाया कच्चा तेल? भारत के लिए झटका क्यों यह डील

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 12, 2023, 09:56 AM IST

Russian Crude Oil: रूस से पहली खेप के रूप में 45 हजार मीट्रिक टन कच्चा तेल कराची पहुंचा है। इसकी पुष्टि खुद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन के कहने पर रूस ने सस्ती कीमत पर पाकिस्तान को कच्चा तेल मुहैया कराया है। इसे भारतीय कूटनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

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शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री

Photo : Twitter

Russian Crude Oil: पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक बदहाली की मार झेल रहा है। महंगाई चरम पर है, विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो चुका है और जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। इस बीच पाकिस्तान को बड़ी राहत मिली है। मुल्क में आसमान छूती तेल की कीमतों के बीच रूस से सस्ते कच्चे तेल की पहली खेप कराची पहुंच चुकी है। इसकी पुष्टि खुद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की है।

जानकारी के मुताबिक, रूस से पहली खेप के रूप में 45 हजार मीट्रिक टन कच्चा तेल कराची पहुंचा है। हालांकि, इसे भारतीय कूटनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन के कहने पर रूस ने सस्ती कीमत पर पाकिस्तान को कच्चा तेल मुहैया कराया है।

शहबाज शरीफ ने दी जानकारी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रूसी कच्चे तेल के कराची पहुंचने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, मैंने देश से किया अपना एक और वादा पूरा किया है। मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि रूस से सस्ते कच्चे तेल की पहली खेप कराची पहुंच चुकी है। कल से तेल की सप्लाई भी शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा, पाकिस्तान के लिए यह एक बदलाव का दिन है। हम समृद्धि, आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा और सामर्थ्य की ओर एक-एक कदम बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, यह पाकिस्तान और रूसी संघ के बीच एक नए रिश्ते की शुरुआत है।

लंबे समय से चल रही थी बातचीत

बता दें, रूस-यूक्रेन जंग शरू होने के बाद भारत ने सस्ते दर पर रूस से कच्चा तेल खरीदा था। इसके बाद पाकिस्तान ने भी कच्चा तेल आयात करने के लिए रूस से संपर्क किया था। बीते साल दिसंबर 2022 से दोनों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत चल रही थी। हालांकि, रूस ने 30 प्रतिशत डिस्काउंट पर पाकिस्तान को कच्चा तेल देने से इंकार कर दिया था। हालांकि, जनवरी में दोनों देशों के बीच फिर से बैठक हुई और अप्रैल में पाकिस्तान ने रूस को अपना पहला ऑर्डर दिया था। माना जा रहा है कि अगर सबकुछ ठीक रहा था तो पाकिस्तान प्रतिदिन एक लाख बैरल तेल खरीद सकता है।

भारत के लिए झटका क्यों

रूस और पाकिस्तान के बीच हुई यह डील भारतीय कूटनीति के लिए झटका मानी जा रही है। दरअसल, अमेरिका से अच्छे संबंध होने के चलते रूस ने पाकिस्तान से दूरी बनाकर रखी थी। हालांकि, बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और अमेरिका के बीच संबंध मजबूत होते जा रहे हैं। वहीं, चीन से करीबी का लाभ सीधे तौर पर पाकिस्तान को मिल रहा है। ऐसे में जब रूस पर कई प्रतिबंध लगे हुए हैं, तब पाकिस्तान को कच्चा तेल पहुंचना भारत के लिए चुनौती के समान है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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