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700 से अधिक हवाई बम, 170 से ज्यादा लड़ाकू ड्रोन और 80 मिसाइलों से हमला; कब थमेगा रूस-यूक्रेन युद्ध?

Russia-Ukraine War: रूस ने यूक्रेन के खिलाफ इस हफ्ते में 700 से अधिक निर्देशित हवाई बम, विभिन्न प्रकार के 170 से अधिक लड़ाकू ड्रोन और लगभग 80 मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। इसकी जानकारी खुद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर साझा की है। रिपोर्ट में देखिए खास बातें।

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रूस पर यूक्रेन का एक और बड़ा दावा।

Volodymyr Zelenskyy on Russia Attack: रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ा युद्ध कब थमेगा? इस सवाल का जवाब पूरी दुनिया तलाश रही है। आए दिन यूक्रेन के ठिकानों पर बमबारी हो रही है, मिसाइल से हमले हो रहे हैं, बेगुनाहों की मौत का सिलसिला जारी है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बड़ा दाला किया है। उन्होंने बताया है कि रूस ने बीते एक हफ्ते में यूक्रेन के खिलाफ भारी तादाद में हथियारों का इस्तेमाल किया है।

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने शेयर किया बर्बादी का वीडियो

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इससे जुड़ी एक जानकारी साझा की है। उन्होंने लिखा, 'अकेले इस सप्ताह की शुरुआत से ही रूस ने यूक्रेन के खिलाफ 700 से अधिक निर्देशित हवाई बम, विभिन्न प्रकार के 170 से अधिक लड़ाकू ड्रोन और लगभग 80 मिसाइलों का इस्तेमाल किया है।'

जेलेंस्की ने आगे कहा कि इस बुराई के पैमाने को जीवन की रक्षा के लिए निर्णयों के पैमाने से मेल खाना चाहिए। प्रत्येक भागीदार एक अंतर ला सकता है और आतंक के खिलाफ रक्षा को मजबूत कर सकता है। यूक्रेन हमारे उन सभी दोस्तों का आभारी है जो ऐसा करते हैं। साथ मिलकर हम बुराई पर विजय प्राप्त करेंगे।

यूक्रेन के ड्रोन हमले में रूसी तेल डिपो में आग लगी

इससे पहले बीते शनिवार को यूक्रेन के खेरसॉन क्षेत्र में रूस की गोलाबारी में तीन लोगों की मौत हो गई थी। यह जानकारी स्थानीय अधिकारियों ने यहां दी। इस बीच, शुक्रवार एवं शनिवार की दरमियानी रात रूस और यूक्रेन के बीच लगातार ड्रोन हमले हुए। आंशिक रूप से कब्जे वाले खेरसॉन प्रांत के गवर्नर अलेक्सांद्र प्रोकुडिन ने बताया कि इसकी राजधानी के करीब हुए हमले में दो लोगों की मौत हो गयी और दो घायल हो गए। यूक्रेन के उत्तर-पूर्वी खारकीव क्षेत्र के गवर्नर ओलेह सिनीहुबोव के अनुसार, शनिवार दोपहर एक और व्यक्ति की मौत हो गई और 16 अन्य घायल हो गए।

यूक्रेनी सेना ने शनिवार तड़के रूस के दक्षिण-पश्चिमी रोस्तोव क्षेत्र स्थित त्सिमल्यांस्की जिले में एक तेल डिपो को निशाना बनाया। ड्रोन हमले में रूस के रोस्तोव इलाके में स्थित एक तेल डिपो में आग लग गई। यह सीमावर्ती क्षेत्र पर कीव की सेना द्वारा किया गया नवीनतम लंबी दूरी का हमला है।

तेल टर्मिनल को निशाना बना रही रूसी सेना

यूक्रेन ने हाल के महीनों में क्रेमलिन के युद्ध तंत्र को कुंद करने के प्रयास में विभिन्न रिफाइनरी और तेल टर्मिनल को निशाना बनाते हुए रूसी धरती पर हवाई हमले बढ़ा दिए हैं। रूसी सेना पूर्वी यूक्रेन में अग्रिम पंक्ति पर कड़ी मेहनत कर रही है, जहां युद्ध के तीसरे वर्ष में सैनिकों और गोला-बारूद की कमी के कारण यूक्रेनी सैनिक कमजोर हुए हैं। रोस्तोव के क्षेत्रीय गवर्नर वसीली गोलुबेव ने कहा कि ड्रोन हमले से 200 वर्गमीटर (2,100 वर्ग फुट) में आग लग गई, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। टेलीग्राम पर आग की सूचना देने के लगभग पांच घंटे बाद, गोलुबेव ने कहा कि आग बुझा दी गई है।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि रूसी हवाई रक्षा प्रणालियों ने रोस्तोव क्षेत्र में दो ड्रोन को रोकने के अलावा, रात भर में देश के पश्चिमी कुर्स्क और बेलगोरोद क्षेत्रों में दो ड्रोन को नष्ट कर दिया। इस बीच, यूक्रेन की वायुसेना ने शनिवार सुबह कहा कि उसने रात भर में रूस द्वारा इस्तेमाल किये गये पांच ड्रोन में से चार को रोक दिया।

यूक्रेन की वायुसेना के कमांडर मायकोला ओलेशुक ने कहा कि पांचवां ड्रोन बेलारूस की दिशा में यूक्रेनी हवाई क्षेत्र से निकल गया। इस बीच, यूक्रेन की सीमा से लगे रूस के बेलगोरोद क्षेत्र के गवर्नर व्याचेस्लाव ग्लैडकोव ने शनिवार को बताया कि क्षेत्र के शेबेकिनो शहर में गोलाबारी में आठ लोग घायल हो गए। अन्य घटनाक्रमों में, आंशिक रूप से कब्जे वाले पूर्वी दोनेत्स्क क्षेत्र के यूक्रेनी गवर्नर वादिम फिलाशकिन ने शनिवार को कहा कि शुक्रवार को रूसी हमलों में छह लोग मारे गए और 22 घायल हो गए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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