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Russia Ukraine War: निर्णायक मोड़ पर रूस-यूक्रेन जंग, अब रूसी मिसाइलों ने यूक्रेन के शहर पर गिराए फॉस्फोरस बम

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 7, 2023, 01:03 PM IST

Russia Ukraine War: युद्ध में फॉस्फोरस बम हमले को काफी खतरनाक माना जाता है। हालांकि, इन बमों पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन यह तेजी से आग पैदा करते हैं, जिससे कई जानें जा सकती हैं। ऐसे में इन बमों का नागरिक क्षेत्र में इस्तेमाल युद्ध अपराध माना जाता है।

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Russia Ukraine War: निर्णायक मोड़ पर रूस-यूक्रेन जंग, अब रूसी मिसाइलों ने यूक्रेन के शहर पर गिराए फॉस्फोरस बम

Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग धीरे-धीरे निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। जब से यूक्रेन की ओर से क्रेमलिन पर ड्रोन हमला किया गया है रूस ने हमलों की रफ्तार बढ़ा दी है। इस बीच खबर है कि रूसी मिसाइलों ने यूक्रेन के शहर बखमुत पर फास्फोरस बम दागे हैं। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें यूक्रेन शहर बखमुत को जलते हुए दिखाया गया है।

रूस की ओर से यूक्रेन पर फास्फोरस बम का हमला तब किया गया है, जब यूक्रेन की ओर से क्रेमलिन पर ड्रोन अटैक का दावा किया गया था। रूस ने कहा था कि यह हमला रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हत्या के लिए किया गया था। हालांकि, रूस ने इस ड्रोन हमले को निरस्त कर दिया था।

काफी खतरनाक होते हैं फास्फोरस बम

युद्ध में फॉस्फोरस बम हमले को काफी खतरनाक माना जाता है। हालांकि, इन बमों पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन यह तेजी से आग पैदा करते हैं, जिससे कई जानें जा सकती हैं। ऐसे में इन बमों का नागरिक क्षेत्र में इस्तेमाल युद्ध अपराध माना जाता है। यूक्रेन की ओर से शेयर की गई वीडियो में दिखाया गया है कि बखमुत की ऊंची इमारतों को लक्षित कर हमला गया, जिसके बाद देखते ही देखते ये इमारतें आग का गोला बन गईं। हालांकि, रूस ने कभी भी इन हथियारों के प्रयोग की बात स्वीकार नहीं की है।

बखमुत में छिड़ी है भीषण लड़ाई

यूक्रेन के बखमुत शहर को रूस रणनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानता है। ऐसे में वह लंबे समय से इस शहर पर कब्जा करने की कोशिश में लगा है। हालांकि, यूक्रेनी सैनिकों ने उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया गया है। अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बखमुत पर किए गए हमलों में रूस अपने हजारों सैनिकों को खो चुका है। हालांकि, हर बार रूस ने इस दावे को खारिज किया है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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