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सैनिकों के बदले उत्तर कोरिया को एयर डिफेंस मिसाइलें भेज रहा रूस, दक्षिण कोरिया का बड़ा दावा

North Korea Russia News: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिन वोनसिक ने दावा किया है कि रूस ने उत्तर कोरिया को सैनिकों के बदले एयर डिफेंस मिसाइलें दी हैं। इसके अलावा रूस ने उत्तर कोरिया को आर्थिक सहायता और विभिन्न सैन्य तकनीकें भी मुहैया कराई हैं।

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North Korea Kim Jong Un and Russia Vladimir Putin

Photo : AP

North Korea Russia News: रूस और यूक्रेन के खिलाफ जंग में उत्तर कोरियाई सैनिकों की मौजूदगी ने दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है। खुद अमेरिका और यूक्रेन यह दावा कर चुके हैं कि उत्तर कोरिया ने रूस की मदद के लिए अक्टूबर में 10,000 से ज्यादा सैनिकों भेजा है। इनमें से कई सैनिक यूक्रेन के खिलाफ जंग में रूसी सैनिकों का साथ दे रहे हैं। इस बीच दक्षिण कोरिया ने रूस और उत्तर कोरिया के बीच हुई सीक्रेट डील का खुलासा किया है।

दक्षिण कोरिया के एक शीर्ष अधिकारी ने दावा किया है कि रूस ने उत्तर कोरिया को सैनिकों के बदले एयर डिफेंस मिसाइलें दी हैं। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिन वोनसिक ने एक टीवी कार्यक्रम में यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि रूस ने प्योंगयांग के एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए मिसाइलें और अन्य उपकरण मुहैया कराए हैं।

एयर डिफेंस मजबूत करना चाहता है उत्तर कोरिया

कई पर्यवेक्षकों का कहना है कि प्योंयांग को अपनी हवाई रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता महसूस हो रही है क्योंकि पिछले महीने उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर प्योंगयांग में प्रचार पत्रक गिराने का आरोप लगाया था। पर्यवेक्षकों के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने धमकी दी थी कि अगर फिर से पत्रक गिराए गए तो वह सैन्य कार्रवाई करेगा। हालांकि दक्षिण कोरिया की सेना ने इस बात की पुष्टि करने से इनकार कर दिया कि कथित ड्रोन उड़ानों के पीछे उसका हाथ था या नहीं।

रूस ने आर्थिक सहायता भी कराई मुहैया

शिन ने कहा कि रूस ने उत्तर कोरिया को आर्थिक सहायता और विभिन्न सैन्य तकनीकें भी मुहैया कराई हैं, जिनमें कोरियाई राष्ट्र को अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणाली बनाने में मदद करने वाली तकनीक भी शामिल है। इससे पहले दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी ने बीते बुधवार को बताया था उत्तर कोरिया ने हाल ही में रूस को अतिरिक्त तोपखाना प्रणाली भी भेजी है। वहीं, पिछले महीने, राष्ट्रीय खुफिया सेवा ने कहा था कि उत्तर कोरिया ने रूस के घटते हथियारों के भंडार को फिर से भरने के लिए अगस्त 2023 से रूस को तोपखाना, मिसाइल और अन्य पारंपरिक हथियारों के 13,000 से अधिक कंटेनर भेजे हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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