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यूक्रेन पर फिर टूटा रूस का कहर! 170 ड्रोन और 10 से अधिक मिसाइलों को मार गिराया

रूस ने 170 ड्रोन और पश्चिमी देशों से यूक्रेन को आपूर्ति की गई आठ मिसाइलों को मार गिराया। रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार तड़के काला सागर के ऊपर यूक्रेनी नौसेना के 14 ड्रोन नष्ट कर दिए गए। इस बीच, कुछ क्षेत्रों के गवर्नर ने यूक्रेन द्वारा किए गए ड्रोन हमलों में आम लोगों को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी है।

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रूस ने यूक्रेन पर फिर बरपाया कहर। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Russia vs Ukraine: रूस ने शनिवार को दावा किया कि उसने क्रीमिया और यूक्रेन की सीमा से लगते उसके इलाकों को निशाना बनाकर शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात किए गए हमले पर जवाबी कार्रवाई की और 170 ड्रोन तथा 10 से अधिक मिसाइलों को मार गिराया।

यूक्रेन पर लगातार कहर बरपा रहा है रूस

रूसी रक्षा मंत्रालय ने टेलीग्राम चैनल पर जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि स्थानीय समायानुसार शुक्रवार रात 10 बजे से शनिवार सुबह पांच बजे के बीच रूसी वायु रक्षा इकाइयों ने क्रीमिया के ऊपर 96, क्रास्नोडार क्षेत्र में 47, रोस्तोव के ऊपर नौ, तथा मॉस्को के दक्षिण-पश्चिम में ब्रायंस्क और कुर्स्क क्षेत्रों में आठ-आठ स्थिर डैने वाले ड्रोन मार गिराए। इसने बताया कि दो मानवरहित विमान (यूएवी) को बेलगोरोद में मार गिराया गया।

मंत्रालय ने दावा किया कि इनके अलावा, ब्रिटेन द्वारा आपूर्ति की गई आठ ‘स्टॉर्म शैडो’ क्रूज मिसाइलें और यूक्रेन द्वारा विकसित तीन नेप्च्यून-एमडी निर्देशित मिसाइलें भी काला सागर के ऊपर नष्ट कर दी गईं।

काला सागर के ऊपर यूक्रेनी नौसेना के 14 ड्रोन नष्ट

रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार तड़के काला सागर के ऊपर यूक्रेनी नौसेना के 14 ड्रोन नष्ट कर दिए गए। इस बीच, कुछ क्षेत्रों के गवर्नर ने यूक्रेन द्वारा किए गए ड्रोन हमलों में आम लोगों को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी है।

रोस्तोव के गवर्नर यूरी स्लीसर के हवाले से आरटी डॉट कॉम समाचार पोर्टल ने कहा, ‘‘ड्रोन के गिरे मलबे के कारण त्सेलिना गांव में एक घर की छत पर आग लग गई, जिसके बाद दो वयस्कों और दो बच्चों को निकाला गया। एक गैर-आवासीय इमारत भी क्षतिग्रस्त हो गई।’’

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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