Sarvath Ikramullah Journey to Jordon: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जॉर्डन यात्रा ने भारत और हाशमाइट किंगडम के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनयिक और सांस्कृतिक संबंधों पर नई रोशनी डाली है। लेकिन जहां आधुनिक संबंध रणनीतिक सहयोग और व्यापार पर आधारित हैं, लेकिन राजकुमारी सरवत अल हसन के जरिए दोनों देशों के बीच जो एक मजबूत व्यक्तिगत और ऐतिहासिक जुड़ाव है, उसे नहीं भूला जा सकता। 1947 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में जन्मी सरवत इकरामुल्लाह के कारण कूटनीति से अलग भारतीय उपमहाद्वीप और जॉर्डन के शाही परिवार का गहरा संबंध है।
आइए ऐसे में राजकुमारी सरवत की कहानी जानते हैं कैसे वह पश्चिम एशियाई शाही परिवार के साथ जुड़ीं। उनका जन्म भारत के विभाजन से कुछ महीने पहले राजनयिकों और बुद्धिजीवियों के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके पिता, मोहम्मद इकरामुल्लाह भारतीय सिविल सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी थे जो बाद में पाकिस्तान के पहले विदेश सचिव बने।
उनकी मां, बेगम शैस्ता सुहरावर्दी इकरामुल्लाह, एक प्रमुख राजनीतिज्ञ, राजनयिक और पाकिस्तान की संविधान सभा की पहली महिला सदस्यों में से एक थीं। खास बात यह है कि राजकुमारी सरवत अविभाजित बंगाल के पूर्व प्रधानमंत्री और बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी की भतीजी भी हैं।
कोलकाता से हाशमाइट सिंहासन तक
राजकुमारी सरवत की जॉर्डन के शाही दरबार तक की यात्रा लंदन में शुरू हुई, जहां वह जॉर्डन के दिवंगत राजा हुसैन के भाई प्रिंस हसन बिन तलाल से मिलीं। दोनों ने 1968 में कराची में शादी की। तीन दशकों से ज्यादा समय तक (1965 से 1999 तक) प्रिंस हसन ने जॉर्डन के क्राउन प्रिंस के रूप में काम किया, जहां राजकुमारी सरवत को पश्चिमी एशिया के आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े बदलाव वाले दौर में क्राउन प्रिंसेस बने रहने के लिए याद किया जाता है।
अपने पूरे कार्यकाल के दौरान राजकुमारी सरवत अपनी दक्षिण एशियाई विरासत से बहुत ज्यादा प्रभावित रहीं। वह घर के रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए चलीं। इसके साथ ही जॉर्डन में एक प्रभावशाली हस्ती बन गईं, जिन्होंने शिक्षा, सामाजिक कल्याण और महिलाओं के सशक्तिकरण पर बहुत ज्यादा ध्यान दिया। उन्होंने 1972 में यंग मुस्लिम विमेंस एसोसिएशन की स्थापना की और अम्मान बैकलॉरिएट स्कूल की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो इस क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक है।
भारत-जॉर्डन संबंधों में फायदा
जॉर्डन के शाही परिवार में कोलकाता में जन्मी राजकुमारी की मौजूदगी ने ऐतिहासिक रूप से भारत-जॉर्डन संबंधों को एक अनोखा सॉफ्ट-पावर फायदा दिया है। यह ऐतिहासिक संदर्भ प्रधानमंत्री मोदी की अम्मान में मौजूदा मुलाकातों में एक और गहराई जोड़ता है। जॉर्डन लंबे समय से पश्चिम एशियाई क्षेत्र में भारत का एक प्रमुख भागीदार रहा है, खासकर ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी मामलों में। हालांकि, 'सरवत कनेक्शन' इस बात की याद दिलाता है कि यह रिश्ता सिर्फ लेन-देन वाला नहीं है।
