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बांग्लादेश में होगी शेख हसीना की वापसी? बदल रहा समीकरण, तख्तापलट की अटकलों के बीच हो रहे दावे

शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने उम्मीद जताई है कि शेख हसीना की बांग्लादेश में वापसी हो सकती है। कुछ नेताओं ने दावा किया है कि कुछ महीनों के भीतर पार्टी धमाकेदार वापसी कर सकती है।

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बांग्लादेश की अपदस्थ पीएम शेख हसीना

Photo : PTI

बांग्लादेश में राजनीतिक हालात बेहद पेचीदा होते जा रहे हैं। सैन्य शासन और आपातकाल घोषित होने की अटकलों ने भ्रम को ओर बढ़ा दिया है। दावा किया जा रहा है, बांग्लादेश की अपदस्थ पीएम शेख हसीना वापस अपने देश जा सकती हैं, सत्ता संभाल सकती है।

हो सकती है धमाकेदार वापसी

पिछले साल अगस्त में सत्ता और देश छोड़ने को मजबूर हुईं शेख हसीना खुलकर बांग्लादेश के हालात पर बोल रही हैं। उनकी पार्टी आवामी लीग भी जमीन पर सक्रिय होती दिख रही हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में चुनावों की सुगबुगाहट के बीच हसीना ने अवामी लीग के समर्थकों से एकजुट होने की अपील की है। कुछ नेताओं ने दावा किया है कि कुछ महीनों के भीतर पार्टी धमाकेदार वापसी कर सकती है।

हसीने के बेटे को वापसी की उम्मीद

इस बीच, शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय, यूएसए अवामी लीग के उपाध्यक्ष रब्बी आलम और पार्टी के संयुक्त महासचिव एएफएम बहाउद्दीन नसीम सहित अवामी लीग के कई पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि हसीना की बांग्लादेश में वापसी हो सकती है। हालांकि, आवामी लीग की वापसी इतनी आसानी से नहीं होने वाली है। उसकी रास्ते में आने वाली बाधाओं की लिस्ट लंबी है। हाली ही बीएनपी और जमात सहित प्रतिद्वंद्वी समूहों के साथ हिंसक झड़पों ने ढाका में अवामी लीग की रैली को विफल कर दिया।

विरोध हो सकते हैं एकजुट

शेख हसीना की संभावित वापसी उनके विरोधियों को फिर एकजुट कर सकती है जो फिलहाल एक दूसरे से दूर जाते दिख रहे हैं। दरअसल अगस्त 2024 में लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार को हटाने के दौरान बांग्लादेश में विभिन्न राजनीतिक संगठनों में अभूतपूर्व एकता दिखी थी लेकिन अब इसमें दरार नजर आने लगी है।

सेना ही भूमिका अहम

लेकिन सबसे अहम सेना की भूमिका होगी। उसका झुकाव देश का आने वाला भविष्य तय करेगा। सुरक्षा बलों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाने और यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बता दें सेना छह महीने से अधिक समय से मजिस्ट्रेसी शक्तियों का इस्तेमाल कर रही है और नागरिक प्रशासन की मदद कर रही हैं।

विरोधियों के बीच टकराव

हालांकि ऐसा लगता है कि सेना, राजनीतिक दलों और शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन शुरू करने वाले छात्र संगठनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक प्रमुख छात्र कार्यकर्ता और नई नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी), के नेता हसनत अब्दुल्ला ने हाल ही में सेना प्रमुख के बारे में एक बड़ा दावा किया है। न्होंने कहा कि सेना प्रमुख जनरल वकार उज-जमान नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार नियुक्त करने के इच्छुक नहीं थे।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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