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पाकिस्तान में आम लोगों पर चल रहीं ताबड़तोड़ गोलियां, PoK से लेकर लंदन तक विरोध, कहा- पाकिस्तानी सेना कुत्तों से भी बुरी

Joint Awami Action Committee Protests: सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही फायरिंग के बावजूद, 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' के आह्वान पर मुजफ्फरबाद लॉन्ग मार्च के लिए PoK के विभिन्न इलाकों से प्रदर्शनकारियों के बड़े-बड़े काफिले रावलाकोट पहुंच रहे हैं।

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पाकिस्तानी पुलिस आम लोगों पर चला रही खुलेआम गोलियां, PoK में गृहयुद्ध जैसे हालात; रावलाकोट से मुजफ्फरबाद बाद तक जनसैलाब (Video/Screengrab)

PoK Muzaffarabad Unrest: पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात पूरी तरह से बेकाबू और विस्फोटक हो चुके हैं। क्षेत्र में अधिकारों की मांग को लेकर जारी नागरिक आंदोलन पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई के कारण स्थिति गृहयुद्ध जैसी बन गई है। पुंछ के कमिश्नर सरदार वाहीद खान के अनुसार, रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई भयंकर झड़पों में अब तक 4 पुलिसकर्मियों समेत 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है और सैकड़ों नागरिक गंभीर रूप से घायल हैं।

इस बीच, सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही अंधाधुंध फायरिंग और इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद, 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के आह्वान पर मुजफ्फरबाद लॉन्ग मार्च के लिए PoK के विभिन्न इलाकों से प्रदर्शनकारियों के बड़े-बड़े काफिले रावलाकोट पहुंच रहे हैं।

सरेराह गोलियां और अफरातफरी: वायरल वीडियो से खुली पोल

इलाके से सामने आ रहे ग्राउंड वीडियो और रिपोर्ट्स दिल दहला देने वाले हैं। पाकिस्तानी पुलिस और रेंजर्स खुलेआम आम नागरिकों पर गोलियां चला रहे हैं, जिसके कारण चारों तरफ चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल है।

बर्बरता और गिरफ्तारियां: पुलिस द्वारा लगातार प्रदर्शनकारियों के घरों और ठिकानों पर दबिश (छापेमारी) दी जा रही है। अब तक 100 से अधिक लोगों को पुलिस अवैध रूप से गिरफ्तार कर चुकी है।

हिंसा की मुख्य वजह: स्थानीय प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने रविवार को रावलाकोट के सैन्य अस्पताल पर हमला किया। वहीं जनता का कहना है कि यह गुस्सा तब भड़का जब एक स्थानीय व्यापारी (JAAC कार्यकारी सदस्य शाहजैब हबीब) की कानून प्रवर्तन कर्मियों के साथ टकराव के दौरान गोली लगने से मौत हो गई।

मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने पाकिस्तान सरकार को घेरा

PoK में जारी इस खूनी संघर्ष पर पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने सोमवार को एक कड़ा बयान जारी कर अपनी गहरी चिंता और आपत्ति व्यक्त की है:

आतंकवाद-रोधी कानून के तहत बैन का विरोध: HRCP ने स्थानीय और केंद्र सरकार के उस फैसले की कड़ी निंदा की है, जिसके तहत नागरिक अधिकारों के लिए लड़ रही संस्था 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) को आतंकवाद-रोधी कानून (Anti-Terrorism Act) के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है।

संवाद की मांग: आयोग ने कहा कि नागरिकों पर बल प्रयोग करना और सूचनाओं को दबाने के लिए मोबाइल, इंटरनेट व संचार सेवाएं बंद कर देना बुनियादी अधिकारों का हनन है। आयोग ने सरकार से तनाव न बढ़ाने और वास्तविक व समावेशी वार्ता शुरू करने की अपील की है। स्थिति की जमीनी समीक्षा के लिए HRCP एक तथ्यान्वेषण दल (Fact-Finding Team) भी PoK भेजने जा रहा है।

आखिर क्यों सुलग रहा है PoK?

यह पहली बार नहीं है जब PoK की जनता पाकिस्तान के खिलाफ सड़कों पर उतरी है। पिछले साल (2025) भी बिजली के अत्यधिक बिलों, आटे की बढ़ती कीमतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसमें कई लोगों की जान गई थी।

इस बार आंदोलन का दायरा और बढ़ गया है। प्रदर्शनकारी न केवल आर्थिक सुधारों, बल्कि राजनीतिक अधिकारों की भी मांग कर रहे हैं। वे विशेष रूप से क्षेत्रीय विधानसभा में '12 शरणार्थी सीटों' (Refugee Seats) को खत्म करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनका आरोप है कि इन आरक्षित सीटों का इस्तेमाल पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियां PoK की स्थानीय सरकार को रिग (प्रभावित) करने के लिए करती हैं।

वैश्विक स्तर पर विरोध

PoK में पाकिस्तानी सेना की इस क्रूरता की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है। पाकिस्तान की इस दमनकारी नीति के खिलाफ ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड में रहने वाले कश्मीरी डायस्पोरा ने पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर इकट्ठा होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने PoK में हो रहे मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन, इंटरनेट निलंबन और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर की जा रही गोलीबारी को तुरंत रोकने की मांग की है।

लंदन में रह रहे पाकिस्तानियों ने पाकिस्तान उच्चायोग में एक ज्ञापन सौंपा। हाई कमीशन के सामने जबरदस्त प्रदर्शन किया गया। पाकिस्तानी दूतावास के बाहर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने पाकिस्तान की सेना और मीडिया पर तीखा निशाना साधा। गुस्से से भरे प्रदर्शनकारी ने नारेबाजी करते हुए कहा, 'पाकिस्तानी सेना को कुत्ता कहना कुत्तों की तौहीन है, और जियो न्यूज को कुत्ता कहना भी कुत्तों की तौहीन है।'

प्रदर्शनकारी के इस बयान पर मौके पर मौजूद लोगों ने जोरदार नारेबाजी की और पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था, सेना तथा मीडिया की भूमिका के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और जमीनी हकीकत को दुनिया के सामने आने से रोका जा रहा है। दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान सरकार, सेना और मीडिया के खिलाफ कई तीखे नारे सुनाई दिए, जिससे वहां का माहौल काफी गरमाया हुआ नजर आया।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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