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अर्जेंटीना के दौरे पर पीएम मोदी, कांग्रेस ने इंदिरा और मनमोहन सिंह से यात्रा को जोड़कर कही ये बात

PM Modi Argentina Visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अर्जेंटीना यात्रा पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि आज अर्जेंटीना में हैं। तीन देश जा चुके हैं, दो देश और जाना बाकी है। भारतीय नागरिकों के लिए अर्जेंटीना का सीधा मतलब डिएगो अरमांडो माराडोना और लियोनेल मेस्सी है। लेकिन तीन गहरे संबंध भी हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी के अर्जेंटीना दौरे पर का कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कही ये बात

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

PM Modi Argentina Visit: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अर्जेंटीना यात्रा के बीच शनिवार को इस दक्षिण अमेरिकी देश से जुड़े कुछ विषयों के संदर्भ में पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह को याद किया। प्रधानमंत्री मोदी अर्जेंटीना की दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार शाम (स्थानीय समयानुसार) ब्यूनस आयर्स पहुंचे और इस दौरान वह देश के शीर्ष नेतृत्व के साथ दोनों देशों के बीच जारी सहयोग की समीक्षा करेंगे तथा प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि आज अर्जेंटीना में हैं। तीन देश जा चुके हैं, दो देश और जाना बाकी है। भारतीय नागरिकों के लिए अर्जेंटीना का सीधा मतलब डिएगो अरमांडो माराडोना और लियोनेल मेस्सी है। लेकिन तीन गहरे संबंध भी हैं। उन्होंने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नवंबर 1924 में एक प्रमुख साहित्यकार विक्टोरिया ओकाम्पो के निमंत्रण पर अर्जेंटीना का दौरा किया था। टैगोर की रचनाएं पहले से ही बहुत प्रसिद्ध थीं... टैगोर की 52 कविताओं का संग्रह, जिसे पूरबी कहा जाता है - ठीक सौ साल पहले प्रकाशित हुआ था जो विजया को समर्पित था। यह नाम उन्होंने ओकाम्पो को दिया था।

कांग्रेस महासचिव ने इस बात का उल्लेख किया कि सितंबर 1968 में इंदिरा गांधी ने ब्यूनस आयर्स में ओकाम्पो से मुलाकात की और उन्हें टैगोर के विश्व-भारती विश्वविद्यालय की ‘डॉक्टर ऑफ लिटरेचर’ मानद उपाधि प्रदान की। उन्होंने कहा कि जोस लुइस बोर्गेस 20वीं सदी के अर्जेंटीना और स्पेनिश साहित्य के दिग्गज थे। 1906 में जब वह सात साल के थे, तब बोर्गेस ने सर एडविन अर्नोल्ड की ‘द लाइट ऑफ़ एशिया’ पढ़ी थी तथा इससे उन्हें बुद्ध के जीवन को और भी ज़्यादा पढ़ने एवं जानने की प्रेरणा मिली। बुद्ध का प्रभाव बोर्गेस की लघु कथाओं, निबंधों, कविताओं और व्याख्यानों में झलकता है। 1986 में मृत्यु से 10 साल पहले, बोर्गेस की किताब ‘क्यू एस एल बुदिस्मो’ (बौद्ध धर्म क्या है) प्रकाशित हुई थी जो बुद्ध के प्रति उनके जीवन भर के आकर्षण को दर्शाती है।

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का पीएम मोदी कर रहे इस्तेमाल: जयराम रमेश

रमेश के अनुसार, राउल प्रीबिश 1950 और 1960 के दशक में विशेष रूप से एक बहुत ही प्रभावशाली अर्थशास्त्री थे। उन्होंने व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की स्थापना में मदद की, जो एक ऐसा संगठन रहा जिसने यूएनसीटीएडी के रूप में विश्व आर्थिक इतिहास में अपना स्थान अर्जित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने जनवरी 1966 से मई 1969 के दौरान न्यूयॉर्क में यूएनसीटीएडी में काम किया था और इस दौरान की उनकी अपनी दो बेटियों के साथ एक प्यारी सी तस्वीर भी है। रमेश ने इस बात का उल्लेख किया कि यूएनसीटीएडी का दूसरा सत्र जनवरी-मार्च 1968 के दौरान नयी दिल्ली में आयोजित किया गया था और पहली बार एक विकासशील देश ने संयुक्त राष्ट्र के किसी प्रमुख कार्यक्रम की मेजबानी की। उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ एक और शब्द है जिसका इस्तेमाल अब प्रधानमंत्री मोदी तथा विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा बहुत अधिक किया जा रहा है, उसका प्रचार भी यूएनसीटीएडी द्वारा किया गया था, हालांकि इसका पहली बार इस्तेमाल ब्रिटिश बैंकर ओलिवर फ्रैंक्स ने 1960 में किया था।

Shashank Shekhar Mishra
Shashank Shekhar Mishraauthor

शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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