PM Modi Argentina Visit: अपनी 5 देशों की यात्रा के तीसरे चरण में शनिवार को अर्जेंटीना पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वहां के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने जोरदार स्वागत किया। राजधानी ब्यूनस आयर्स में गार्ड ऑफ ऑनर के बाद पीएम मोदी जब राष्ट्रपति महल पहुंचे तो मिलेई गर्मजोशी से उनसे गले मिले। दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग एवं रिश्तों को नई ऊंचाई देने के लिए दोनों देशों के शिष्टमंडल स्तर की वार्ता हुई। इस वार्ता में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल थे।
आपसी सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा
ऐसा समझा जाता है कि मोदी और मिलेई के बीच मुख्य रूप से व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कृषि और महत्वपूर्ण खनिजों समेत कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्ष व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, तेल और गैस, परमाणु ऊर्जा, कृषि, सांस्कृतिक और प्रौद्योगिकी जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं। भारत और अर्जेंटीना के बीच खनिज संसाधन क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग है, विशेष रूप से लिथियम में - जो भारत के हरित ऊर्जा परिवर्तन के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है। खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर अगस्त 2022 में हस्ताक्षर किए गए थे। समझौता ज्ञापन के ढांचे के तहत गठित संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक जनवरी में हुई थी।
अर्जेंटीना का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था भारत
भारत और अर्जेंटीना के बीच द्विपक्षीय व्यापार में तेजी आई है। वर्ष 2021 और 2022 में भारत अर्जेंटीना का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। प्रधानमंत्री मोदी अर्जेंटीना की दो दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार शाम (स्थानीय समयानुसार) ब्यूनस आयर्स पहुंचे और इस दौरान वह देश के शीर्ष नेतृत्व के साथ दोनों देशों के बीच जारी सहयोग की समीक्षा करेंगे तथा प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘आज अर्जेंटीना में हैं। तीन देश जा चुके हैं, दो देश और जाना बाकी है। भारतीय नागरिकों के लिए अर्जेंटीना का सीधा मतलब डिएगो अरमांडो माराडोना और लियोनेल मेस्सी है। लेकिन तीन गहरे संबंध भी हैं।’
उन्होंने कहा, ‘रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नवंबर 1924 में एक प्रमुख साहित्यकार विक्टोरिया ओकाम्पो के निमंत्रण पर अर्जेंटीना का दौरा किया था। टैगोर की रचनाएं पहले से ही बहुत प्रसिद्ध थीं… टैगोर की 52 कविताओं का संग्रह, जिसे पूरबी कहा जाता है – ठीक सौ साल पहले प्रकाशित हुआ था जो ‘विजया’ को समर्पित था। यह नाम उन्होंने ओकाम्पो को दिया था।’
