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चार आतंकवादियों का हुआ The End; पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों ने चलाया ऑपरेशन

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों ने एक खुफिया-आधारित ऑपरेशन (आईबीओ) के दौरान "फ़ितना-अल ख़वारिज" के चार आतंकवादियों को मार गिराया, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के हवाले से बताया। इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी के आधार पर शुक्रवार को ऑपरेशन चलाया गया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

Photo : ANI

Security forces Kill Four Terrorists in Khyber Pakhtunkhwa: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के संयुक्त अभियान के दौरान चार आतंकवादी मारे गए। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने शुक्रवार को बताया कि खुफिया जानकारी के आधार पर यह अभियान प्रांत के स्वात जिले में चलाया गया।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में मारे गए चार आतंकवादी

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, आईएसपीआर ने बताया कि सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों से उनके ठिकाने पर मुठभेड़ की, जिसमें चारों आतंकवादी मारे गए। आतंकवादियों के ठिकाने से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया। बयान में कहा गया कि मारे गए आतंकी क्षेत्र में कई आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे। इससे पहले, सुरक्षा बलों ने बुधवार को डेरा इस्माइल खान जिले के मद्दी इलाके में चार आतंकवादियों को मार गिराया था।

पाकिस्तान में आए दिन होते रहते हैं आतंकवादी हमले

एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में 2025 के पहले तीन महीनों में खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में आतंकवादी हमलों में 152 लोग मारे गए। मरने वालों में पुलिस वाले, सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक शामिल थे। केपी पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं में 302 व्यक्ति घायल भी हुए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नागरिक सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। जनवरी से मार्च के बीच 45 लोगों की मृत्यु हुई और 127 लोग घायल हुए। पुलिस बल ने 37 सदस्यों को खो दिया, जबकि 46 अन्य घायल हुए। एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, हमलों में फ्रंटियर कोर (एफसी) के 34 कर्मियों की मृत्यु हो गई तथा 43 अन्य घायल हो गए। थिंक टैंक पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (पीआईसीएसएस) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 में देश में आतंकवादी गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो पिछले महीने की तुलना में 42 प्रतिशत अधिक है।

आतंक से सबसे अधिक प्रभावित प्रांत रहा खैबर पख्तूनख्वा

रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि देश भर में कम से कम 74 आतंकवादी हमले हुए, जिसके परिणामस्वरूप 91 लोगों की मौत हुई, जिनमें 35 सुरक्षाकर्मी, 20 नागरिक और 36 आतंकवादी शामिल थे। इसके अलावा, 117 लोग घायल हुए, जिनमें सुरक्षा बलों के 53 सदस्य, 54 नागरिक और 10 आतंकवादी शामिल थे। खैबर पख्तूनख्वा सबसे अधिक प्रभावित प्रांत रहा, उसके बाद बलूचिस्तान का स्थान रहा।

खैबर पख्तूनख्वा के जिलों में आतंकवादियों ने 27 हमले किये, जिसके परिणामस्वरूप 19 लोग मारे गये, जिनमें 11 सुरक्षाकर्मी, छह नागरिक और दो आतंकवादी शामिल थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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