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दुबई में हादसे का शिकार हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्लेन से उतरते समय पैर की हड्डी टूटी

Pakistan President Asif Ali Zardari: राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चिकित्सक ने जांच के बाद राष्ट्रपति जरदारी के पैर में प्लास्टर चढ़ा दिया। उनके पैर पर चार सप्ताह तक प्लास्टर रहेगा।

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आसिफ अली जरदारी।

Photo : ANI

Pakistan President Asif Ali Zardari: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी हादसे का शिकार हुए हैं। दुबई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान से उतरते समय उनके पैर की हड्डी टूट गई। यह घटना बुधवार रात को हुई लेकिन पाकिस्तान के राष्ट्रपति के कार्यालय ने इसकी पुष्टि बृहस्पतिवार देर रात को की। राष्ट्रपति भवन से जारी एक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति विमान से उतरते समय गिर गए जिसके बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चिकित्सक ने जांच के बाद राष्ट्रपति जरदारी के पैर में प्लास्टर चढ़ा दिया। उनके पैर पर चार सप्ताह तक प्लास्टर रहेगा। राष्ट्रपति जरदारी को घर भेज दिया गया है और उन्हें आराम की सलाह दी गई है। पाकिस्तान के अखबार डॉन ने बताया कि 69 वर्षीय राष्ट्रपति को हाल के वर्षों में कई स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं।

कई बार बीमार हुए राष्ट्रपति जरदारी

बता दें, मार्च 2023 में संयुक्त अरब अमीरात में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के आंख की सर्जरी हुई थी। वर्ष 2022 में उन्हें सीने में संक्रमण के इलाज के लिए एक सप्ताह के लिए कराची के डॉ. जियाउद्दीन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। खराब स्वास्थ्य की अफवाहों के बीच उनके निजी चिकित्सक और करीबी सहयोगी डॉ. आसिम हुसैन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पुष्टि की थी कि वह उनकी सेहत ठीक है। उनके बेटे और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी के अनुसार, जुलाई 2022 में उनमें कोरोना वायरस से संक्रमण की पुष्टि हुई थी, उनमें कोविड-19 के हल्के लक्षण थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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