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Pakistan PM शहबाज शरीफ और हिना रब्बानी के बीच सीक्रेट बातचीत लीक, मची खलबली

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 1, 2023, 12:00 PM IST

Hina Rabbani secret Memo Leaked: हिना रब्बानी खान के सीक्रेट मेमो के महत्वपूर्ण अंश अमेरिकी खुफिया दस्तावेज डिसकॉर्ड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर लीक हुए हैं। हिना रब्बान ने पाक प्रधानमंत्री को चेताया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि पाकिस्तान को अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों को खुश करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

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शहबाज शरीफ और हिना रब्बानी के बीच सीक्रेट बातचीत लीक

Hina Rabbani secret Memo Leaked: पाकिस्तान में इन दिनों बुरा हाल है। एक तरफ यह मुल्क सदी के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है तो दूसरी तरफ अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी के बीच हुई सीक्रेट बातचीत लीक हो गई है। इस बातचीत के सामने आने के बाद पाकिस्तान को एक बार फिर दुनिया के सामने किरकिरी का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, हिना रब्बानी खान के सीक्रेट मेमो के महत्वपूर्ण अंश अमेरिकी खुफिया दस्तावेज डिसकॉर्ड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर लीक हुए हैं। इस मेमो में चीन से लेकर अमेरिका तक का जिक्र है। कहा गया हे कि सीक्रेट मेमो में हिना रब्बानी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अमेरिका को लेकर चेतावनी दी है।

पश्चिम को खुश न करे पाकिस्तान

पाकिस्तान इन दिनों भारत की देखादेखी पश्चिमी देशों से संबंध मजबूत करने में जुटा हुआ है। इसको लेकर हिना रब्बान ने पाक प्रधानमंत्री को चेताया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि पाकिस्तान को अमेरिका व अन्य पश्चिमी देशों को खुश करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। न ही चीन और अमेरिका को लेकर बीच का रास्ता अपनाने की कोशिश करनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान अगर ऐसा करता है, तो उसके चीन के साथ रिश्ते खराब हो सकते हैं। दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से चीन को अपना वास्तविक रणनीतिकार मानता आया है। चीन ने पाकिस्तान में बड़े निवेश भी किए हैं।

कब और कैसे लीक हुआ मेमो

बता दें, पाकिस्तान के नेताओं की सीक्रेट ऑडियो पहले भी लीक हो चुकी है। हालांकि, मंत्री हिना रब्बानी का सीक्रेट मेमो अमेरिका में कब और कैसे लीक हुआ, इसकी जानकारी अभी मीडिया के सामने नहीं आई है। न ही पाकिस्तान के किसी मंत्री द्वारा इस मसले पर कोई बयान दिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अमेरिका ने पाकिस्तान की सियासत में किस तरह जड़ें जमाई हुई हैं।

इमरान खान ने भी अमेरिका को लेकर उठाए थे सवाल

बता दें, इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी अमेरिका को लेकर सवाल खड़े किए थे। यूक्रेन युद्ध के समय इमरान खान की रूस यात्रा को लेकर जब हो हल्ला मचा तो पाकिस्तान के विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि इससे मुल्क को अमेरिका की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।इसके बाद पाकिस्तान के चुनाव को लेकर भी अमेरिकी हस्तक्षेप की बातें सामने आई थीं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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