Pak Minister Threatens India: भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने 'सिंधु जल समझौते' (Indus Waters Treaty) को लेकर राजनयिक और राजनीतिक रार अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के कड़े तेवरों से घबराए पाकिस्तान ने अब बेहद आक्रामक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत को सीधी धमकी देते हुए कहा है कि जो कोई भी पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर नजर डालेगा, इस्लामाबाद उसके हाथ काट देगा।
यह विवाद तब और गहरा गया जब भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद इस संधि को स्थगित करने का फैसला किया। भारत का साफ कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद नहीं करता, तब तक कोई सहयोग संभव नहीं है।
'पीएम मोदी के हाथ में है नल का कंट्रोल'- मुसादिक मलिक
सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुसादिक मलिक ने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान की पानी की सप्लाई को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी मीडिया 'डॉन' के मुताबिक मलिक ने कहा, 'पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री के पास एक नल (टैप) का कंट्रोल है। वह कहते हैं कि वह पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने देंगे।' इसपर पाकिस्तान ने गीदड़भभकी देते हुए कहा कि हमारे पानी पर दावा ठोकने वालों को कड़ा जवाब देंगे।'
मलिक के इस बयान के वीडियो सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हो रहे हैं। सिर्फ मलिक ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी पहले कह चुके हैं कि अगर पाकिस्तान की जल सुरक्षा को कोई खतरा हुआ, तो वे भारत के खिलाफ जंग (War) छेड़ देंगे।
'1960 का समझौता हमेशा का अधिकार नहीं'- भारत का कड़ा जवाब
दूसरी तरफ, भारत ने पाकिस्तान की इन धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने घरेलू संकटों से ध्यान भटकाने का जरिया बताया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 62वें सत्र में भारत की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए इस संधि को आज के समय के हिसाब से 'पुराना' बताया।
अनुपमा सिंह ने कहा कि यह पूरी तरह तर्कहीन है कि एक देश जो अपनी नीति के तहत आतंकवाद का निर्यात करता है, वह दोस्ती और सद्भावना पर आधारित सहयोग के विशेषाधिकारों की मांग करता रहे। उन्होंने साफ किया कि 1960 में तय की गई कोई संधि हमेशा के लिए मिलने वाला ऐसा अधिकार नहीं बन सकती जो आज की वास्तविकताओं, जवाबदेही और छह दशकों में आए बदलावों से अछूती रहे।
क्या है सिंधु जल समझौता (1960)?
वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुए इस समझौते के तहत नदियों को दो हिस्सों में बांटा गया था:
-पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास, सतलुज): इन पर भारत का पूरा नियंत्रण है।
-पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चिनाब): इनका अधिकांश पानी पाकिस्तान को जाता है, जबकि भारत को बिजली बनाने और सीमित सिंचाई के लिए कुछ अधिकार दिए गए हैं।
यह समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कई युद्धों के बाद भी बचा रहा, लेकिन आतंकवाद पर भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के बाद अब इस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को घेरने के लिए आज इस्लामाबाद में एक बड़ा सेमिनार कर रहा है, लेकिन भारत अपने इस रुख पर अडिग है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय बातचीत या सहयोग कभी भी एक साथ नहीं चल सकते। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा हमले के बाद स्थिति और खराब हुई व भारत ने पूरी तरह से पाकिस्तान जाने वाला पानी रोक दिया।
