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ICJ के आदेश की भी अनदेखी कर रहा पाकिस्तान, कहा- कुलभूषण जाधव को सजा के खिलाफ अपील की अनुमति नहीं

Pakistan: पाकिस्तान ने पाकिस्तानी सर्वोच्च न्यायालय में जवाब दाखिल करके बताया है कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को अपील दाखिल करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है। साल 2016 में पाकिस्तान ने जाधव को जासूसी के आरोप में पकड़ने का दावा किया था।

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कुलभूषण जाधव के मामले में फिर पलटा पाकिस्तान

Photo : Twitter

Kulbhushan Jadhav Appeal Against Sentence: पाकिस्तान में जासूसी के आरोपों में मौत की सजा पाए भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान ने एक बार फिर पलटी मार दी है। पाकिस्तानी सर्वोच्च न्यायालय को बुधवार को सूचित किया गया कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को अपनी सजा के विरुद्ध अपील करने का अधिकार प्रदान नहीं किया गया था क्योंकि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के 2019 के निर्णय में केवल राजनयिक संपर्क (कांसुलर एक्सेस) की आवश्यकता पर जोर दिया गया था, न कि उनकी सजा को चुनौती देने के कानूनी अधिकार पर।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय ने कोर्ट में रखा अपना पक्ष

सात न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ के समक्ष उपस्थित हुए पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय के वकील ख्वाजा हारिस अहमद ने कहा कि ICJ के निर्णय ने पाकिस्तान को जासूसी और आतंकवाद के दोषी जाधव को अपील करने का स्वतः अधिकार प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं किया। उन्होंने न्यायालय को बताया कि ICJ के निर्णय ने केवल वियना कन्वेंशन के अनुच्छेद 36 के तहत राजनयिक संपर्क के मुद्दे को संबोधित किया। इसने पाकिस्तान को अपील के अधिकार का विस्तार करने का निर्देश नहीं दिया। पीठ वर्तमान में संघीय और प्रांतीय सरकारों सहित 38 इंट्रा-कोर्ट अपीलों पर सुनवाई कर रही है, जो सर्वोच्च न्यायालय के अक्टूबर 2023 के फैसले के विरुद्ध दायर की गई हैं, जिसने 9 मई के दंगों में शामिल नागरिकों के लिए सैन्य परीक्षणों को रद्द कर दिया था।

बता दें, भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी जाधव का मामला भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे चर्चित कानूनी विवादों में से एक है। 2016 में बलूचिस्तान में गिरफ्तार किए गए जाधव को 2017 में एक सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। भारत ने ICJ का दरवाजा खटखटाया, जिसने पाकिस्तान को उसे राजनयिक संपर्क प्रदान करने का आदेश दिया, लेकिन सजा को पलटने से पहले ही रुक गया। अटॉर्नी जनरल मंसूर उस्मान अवान से इस बात पर विचार करने की अपेक्षा है कि क्या 9 मई के बाद सैन्य अदालतों में मुकदमा चलाए गए पाकिस्तानी नागरिकों को अपील करने की अनुमति दी जानी चाहिए, यह एक ऐसा निर्णय है जिसका चल रही संवैधानिक बहस पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। न्यायमूर्ति जमाल मंडोखैल ने सरकार पर इस बात का दबाव डाला कि क्या औपचारिक FIR दर्ज किए बिना सैन्य अदालत की कार्यवाही शुरू की जा सकती है। वकील ने उत्तर दिया कि पाकिस्तान सेना अधिनियम की धारा 157 के तहत, एक जांच अदालत कार्यवाही शुरू कर सकती है और किसी FIR की आवश्यकता नहीं है।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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