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बुरे फंसे इमरान: पीटीआई के नौ और नेता गिरफ्तार, सैन्य अदालत में चलेगा मुकदमा

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 31, 2023, 08:11 PM IST

Imran Khan News: सैन्य अधिनियम और शासकीय गोपनीयता कानून के तहत मुकदमे का सामना करने वाले ‘पीटीआई’ कार्यकर्ताओं की कुल संख्या 50 से अधिक हो गई है। बुधवार को नौ और नेताओं को गिरफ्तार किया गया है।

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान

Photo : BCCL

Imran Khan News: इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के नौ और सदस्यों को बुधवार को गिरफ्तार कर पाकिस्तानी सेना को सौंप दिया गया। संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों और सरकारी इमारतों पर नौ मई को हुए हमलों में इन सदस्यों की कथित भूमिका को लेकर पाकिस्तान सैन्य अधिनियम के तहत उनके खिलाफ मुकदमा चलेगा।

इन गिरफ्तारियों के साथ, सैन्य अधिनियम और शासकीय गोपनीयता कानून के तहत मुकदमे का सामना करने वाले ‘पीटीआई’ कार्यकर्ताओं की कुल संख्या 50 से अधिक हो गई है।

सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले में हो रही कार्रवाई

अदालत के एक अधिकारी ने कहा, आतंकवाद विरोधी अदालतों के आदेश पर, आईएसआई इमारतों (फैसलाबाद शहर में) और मुल्तान छावनी में सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले में शामिल पीटीआई से जुड़े नौ संदिग्धों को बुधवार को सैन्य अधिनियम एवं शासकीय गोपनीयता कानून के तहत मुकदमा चलाने के लिए उन्हें पाकिस्तानी सेना को सौंप दिया गया।

इमरान की गिरफ्तारी के बाद भड़की थी हिंसा

अर्धसैनिक रेंजर द्वारा नौ मई को भ्रष्टाचार के मामले में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय परिसर से ‘पीटीआई’ के अध्यक्ष 70 वर्षीय खान को गिरफ्तार करने के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने खान की गिरफ्तारी के जवाब में लाहौर कोर कमांडर हाउस, मियांवाली एयरबेस और फैसलाबाद में आईएसआई भवन सहित 12 सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की थी। उग्र भीड़ ने पहली बार रावलपिंडी में सेना मुख्यालय (जीएचक्यू) पर भी धावा बोल दिया था। हिंसा के बाद खान के हजारों समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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