पाकिस्तान के पास अब केवल चार दिनों तक युद्ध लड़ने लायक तोपखाना गोला-बारूद बचा है। यह संकट यूक्रेन और इज़राइल को गोला-बारूद की भारी मात्रा में आपूर्ति के कारण उत्पन्न हुआ है, देखें सुचेतगढ़ बॉर्डर से टाइम्स नाउ नवभारत की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट...
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने आर्थिक संकट से जूझते हुए हथियार निर्यात का रास्ता चुना। पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री (POF) ने यूक्रेन को लाखों की संख्या में तोप के गोले, रॉकेट और छोटे हथियारों के कारतूस भेजे। अकेले फरवरी और मार्च 2023 में 42,000 BM-21 रॉकेट, 60,000 155mm होवित्जर गोले और 130,000 अन्य रॉकेट निर्यात किए गए। इससे पाकिस्तान ने करीब 364 मिलियन डॉलर की कमाई की, जिसका बड़ा हिस्सा सेना के जीएचक्यू को गया।
पाकिस्तान सेना के पास अब 155mm तोप के गोले की भारी कमी है। बिना पर्याप्त गोला-बारूद के SH-15 जैसे माउंटेड गन सिस्टम बेकार साबित हो रहे हैं।

Pak Army
पाकिस्तान का गोला-बारूद संकट: केवल 4 दिनों की युद्ध क्षमता
मुख्य कारण:-
पाकिस्तान ने आर्थिक लाभ के लिए यूक्रेन और संभवतः इज़राइल को बड़ी मात्रा में तोपखाना गोला-बारूद निर्यात किया।
मौजूदा भंडार से पाकिस्तान केवल 4 दिन तक युद्ध लड़ सकता है।
प्रमुख आंकड़े:-
2023 में पाकिस्तान ने यूक्रेन को 42,000 BM-21 रॉकेट, 60,000 155mm होवित्जर शेल और 130,000 रॉकेट बेचे।
इससे 364 मिलियन डॉलर की कमाई हुई, जिसका 80% पाकिस्तान की सेना के जीएचक्यू को गया।
2022-23 में पाकिस्तान के रक्षा निर्यात 3,000% बढ़कर $415 मिलियन हो गए।

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परिणाम:-
155mm गोला-बारूद जैसे अहम संसाधनों की भारी कमी।
पाकिस्तान की SH-15 MGS और अन्य तोप प्रणालियां पर्याप्त गोला-बारूद के बिना बेकार हैं।
भारत के बढ़ते रक्षा आयात से मुकाबला करने में कठिनाई।
आंतरिक संकट:-
आर्थिक मंदी, महंगाई और ईंधन की कमी से सेना को अभ्यास रोकना पड़ा।
राशन में कटौती और युद्धाभ्यास स्थगित।
