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उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण से सकते में जापान-दक्षिण कोरिया; कहा- विश्व शांति को गंभीर खतरा...

उत्तर कोरिया ने मिसाइल परीक्षण ऐसे समय किया है, जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यांग चीन की यात्रा पर रवाना होने वाले थे,जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर स्तरीय बातचीत तय थी। ऐसे में इस लॉन्च को राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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उत्तर कोरिया ने जापान सागर में दागी बैलिस्टिक मिसाइल

उत्तर कोरिया ने रविवार को ईस्ट सी (जापान सागर) की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जिसने दक्षिण कोरिया सहित अमेरिका और जापान की नींद उड़ा दी है। इस मिसाइल प्रक्षेपण को लेकर दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ ने जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि यह 2026 में उत्तर कोरिया का पहला हथियार परीक्षण है,जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। जापान ने भी इस तरह के प्रक्षेपणों को विश्व शांति के लिए खतरा करार दिया है।

दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने बताया कि मिसाइलों को सुबह करीब 7:50 बजे, प्योंगयांग के आसपास के इलाकों से लॉन्च किया गया। प्रक्षेपण की तुरंत पहचान कर ली गई थी। इन मिसाइलों ने करीब 900 किलोमीटर की दूरी तय की। इसके बाद पूरे क्षेत्र में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी गई। JCS ने बयान में कहा कि दक्षिण कोरिया की सेना पूरी तरह अलर्ट मोड में है और मिसाइल से जुड़ी जानकारियां अमेरिका और जापान के साथ साझा की जा रही हैं, ताकि किसी भी संभावित अतिरिक्त लॉन्च पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।

उत्तर कोरिया ने बुलाई राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक

उत्तर कोरिया द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने के बाद दक्षिण कोरिया ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में राष्ट्रपति को सुरक्षा हालात की विस्तृत जानकारी दी गई और उत्तर कोरिया की कार्रवाई के जवाब में उठाए जा सकने वाले विकल्पों पर विचार किया गया। सरकार ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने का फैसला किया है।

जापान ने भी की निंदा

जापान ने भी इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी ने कहा कि उत्तर कोरिया की ओर से किए गए कम से कम दो मिसाइल प्रक्षेपण की पुष्टि हुई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां न केवल जापान बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं।

दक्षिण कोरिया पर दबाव तो नहीं बना रहे किम जोंग उन

यह मिसाइल परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यांग चीन की यात्रा पर रवाना होने वाले थे,जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर स्तरीय बातचीत तय थी। ऐसे में इस लॉन्च को राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अपने दौरे पर रवाना होने से पहले, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यांग ने अपनी चार दिवसीय यात्रा का उद्देश्य भी बताया। उन्होंने कहा कि वे इस दौरान बीजिंग से कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील करेंगे। गौरतलब है कि सियोल और वॉशिंगटन लगातार यह मांग करते रहे हैं कि चीन अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उत्तर कोरिया को परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने और कूटनीतिक बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए प्रेरित करे। हालांकि, विशेषज्ञों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि प्योंगयांग पर चीन का वास्तविक नियंत्रण कितना प्रभावी है।

सात नवंबर को भी दागी थी शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल

इससे पहले उत्तर कोरिया ने 7 नवंबर को ईस्ट सी की ओर एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी। वह पिछले साल का छठा मिसाइल परीक्षण था। प्योंगयांग अक्सर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की कथित शत्रुतापूर्ण नीतियों के विरोध में ऐसे मिसाइल परीक्षण करता रहा है। गौरतलब है कि अक्टूबर में उत्तर कोरिया ने एक भव्य सैन्य परेड के दौरान हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की परमाणु मिसाइलें भी प्रदर्शित की थीं। इसमें ह्वासोंग-11एमए हाइपरसोनिक मिसाइल और ह्वासोंग-20 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) शामिल थीं, जिन्हें उत्तर कोरियाई मीडिया ने देश के अब तक के सबसे शक्तिशाली परमाणु हथियार बताया था।

वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई से वैश्विक स्तर पर तनाव

वैश्विक स्तर पर पहले से ही तनाव का माहौल है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक बड़े सैन्य अभियान में पकड़े जाने के दावे के बाद अंतरराष्ट्रीय हालात और संवेदनशील हो गए हैं। इस बीच, उत्तर कोरिया ने वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह कदम अमेरिका की आक्रामक और गैर-जिम्मेदार नीति को दर्शाता है। मंत्रालय के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और किसी स्वतंत्र देश की संप्रभुता पर सीधा हमला है।

शिव शुक्ला
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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