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सीमा विवाद पर बालेंद्र शाह के बयान से मचा विवाद, घर में ही घिरे पीएम; नेपाली विदेश मंत्रालय को देनी पड़ी सफाई

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के एक बयान ने नेपाल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि "केवल भारत ने ही नेपाल की भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी भारत की भूमि पर कई स्थानों पर अतिक्रमण किया है। उनके इसी बयान को लेकर विवाद शुरू हो गया है।

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बालेंद्र शाह की फाइल फोटो।(फोटो सोर्स: balendra shah facebook)

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के एक बयान ने नेपाल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मार्च में हुए चुनाव के बाद सत्ता संभालने के बाद पहली बार नेपाल की संसद को संबोधित किया। संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर भी बात की। यहां बोलते हुए उन्होंने कहा कि केवल भारत ने ही नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। उनके इस बयान के बाद नेपाल में विवाद खड़ा हो गया है। कई विपक्षी नेताओं,पूर्व राजनयिकों और सीमा विशेषज्ञों ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी,जिसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई जारी करनी पड़ी।

क्या कहा था प्रधानमंत्री ने?

बालेंद्र शाह ने कहा कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे क्षेत्रों को लेकर भारत के साथ चल रहे क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत, वार्ता और राजनयिक प्रयासों के माध्यम से किया जाएगा। सांसदों के सवालों के जवाब में शाह ने कहा कि मामले की समीक्षा से पता चला है कि "भारत ने न केवल नेपाल की भूमि पर अतिक्रमण किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया है।" उन्होंने दोनों पक्षों से सर्वेक्षकों, इतिहासकारों और क्षेत्र विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार इस मुद्दे पर भारत को आधिकारिक राजनयिक नोट भेज चुकी है और दोनों देश इतिहासकारों, सर्वेक्षकों तथा विशेषज्ञों की मदद से बातचीत के जरिए समाधान खोजने पर सहमत हुए हैं। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि "केवल भारत ने ही नेपाल की भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी भारत की भूमि पर कई स्थानों पर अतिक्रमण किया है।

विवाद क्यों बढ़ गया?

उनके इसी बयान को लेकर विवाद शुरू हो गया है। नेपाल में विपक्षी नेताओं ने शाह के बयान को गंभीर बताते हुए संसद की कार्यवाही से इसे हटाने की मांग कर दी। विपक्ष का कहना है कि यदि प्रधानमंत्री के पास इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा उन्हें अपना बयान वापस लेना चाहिए। इतना ही नहीं नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री ने भी प्रधानमंत्री से माफी मांगने की मांग की।

इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। बड़ी संख्या में लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर नेपाल ने भारत की कौन-सी जमीन पर कब्जा किया है, क्योंकि ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड अब तक सामने नहीं आया है।

पूर्व राजनयिकों ने क्या कहा?

भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत निलांबर आचार्य ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी जानकारी की जानकारी नहीं है कि नेपाल ने भारतीय क्षेत्र पर कब्जा किया हो। उनके अनुसार भारत-नेपाल सीमा के लगभग 97 प्रतिशत विवाद पहले ही सुलझाए जा चुके हैं। कुछ जगहों पर सीमा स्तंभों के गायब होने के कारण दोनों देशों के किसान एक-दूसरे की जमीन का उपयोग करते हैं, लेकिन इसे सरकारी स्तर पर अतिक्रमण नहीं कहा जा सकता।

भारत में नेपाल के एक अन्य पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने भी कहा कि नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कब्जे का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है और भारत ने भी कभी ऐसा आरोप दर्ज नहीं कराया। वहीं,सीमा विशेषज्ञ बुद्धि नारायाण श्रेष्ठ ने भी प्रधानमंत्री के दावे को खारिज करते हुए कहा कि नेपाल ने कभी भारतीय क्षेत्र पर कब्जा नहीं किया। हां, कुछ सीमावर्ती इलाकों में किसानों द्वारा एक-दूसरे की जमीन के उपयोग की स्थिति जरूर रही है।

नेपाल के विदेश मंत्रालय को क्यों देनी पड़ी सफाई?

बयान पर बढ़ते विवाद के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस पर सफाई भी दी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी किसी आधिकारिक क्षेत्रीय दावे के बारे में नहीं थी। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री का आशय "दशगजा" (नो-मैन्स लैंड) और सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों द्वारा एक-दूसरे की भूमि के उपयोग से था। नेपाल सरकार के अनुसार कुछ स्थानों पर भारतीय नागरिक नेपाल की जमीन का उपयोग करते हैं और कुछ जगह नेपाली नागरिक भारतीय भूमि का। प्रधानमंत्री का बयान इसी क्रॉस-बॉर्डर ऑक्यूपेशन के संदर्भ में था,न कि किसी औपचारिक क्षेत्रीय कब्जे के संदर्भ में।

भारत-नेपाल सीमा विवाद क्या है?

बता दें कि भारत और नेपाल के बीच सबसे बड़ा सीमा विवाद कालापानी,लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर है। नेपाल का दावा है कि ये क्षेत्र उसके हैं,जबकि भारत इन पर अपना अधिकार जताता है। यह विवाद 1816 की सुगौली संधि की व्याख्या से जुड़ा है। यह संधि नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई थी और वर्तमान भारत-नेपाल सीमा की आधारशिला मानी जाती है। भारत लगातार कहता रहा है कि इस मुद्दे का समाधान द्विपक्षीय बातचीत से होना चाहिए।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब नेपाल में नई सरकार सत्ता में है और भारत-नेपाल संबंधों को लेकर नई दिल्ली तथा काठमांडू के बीच लगातार संवाद चल रहा है।

Shiv Shukla
शिव शुक्ला author

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभ... और देखें

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