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अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स ने रच दिया इतिहास, सबसे लंबी स्पेसवॉक का बनाया रिकॉर्ड

ISS Mission Updates: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने चहलकदमी (Spacewalk) का नया रिकॉर्ड दर्ज किया है। विलियम्स ने स्पेसवॉक को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और इतिहास की सबसे अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री बन गईं। सुनीता के नाम अब 62 घंटे, 6 मिनट की स्पेसवॉक करने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया है।

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अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स ने बनाया स्पेसवॉक का रिकॉर्ड।

Sunita Williams Breaks Spacewalk Record: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा कि अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से 5 घंटे से ज्यादा समय का स्पेसवॉक किया। सुनीता विलियम्स की यह नौवीं और विल्मोर की पांचवीं अंतरिक्ष यात्रा थी।

नासा की सर्वकालिक सूची में चौथे नंबर पर सुनीता विलियम्स

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुनीता विलियम्स के नाम अब 62 घंटे, 6 मिनट की स्पेसवॉक करने का रिकॉर्ड दर्ज है, जो नासा की सर्वकालिक सूची में चौथे नंबर पर है। आईएसएस ने एक्स पर कहा, "नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने पूर्व अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन के 60 घंटे और 21 मिनट के अंतरिक्ष में चहलकदमी के कुल समय को पार कर लिया।" दोनों ने आईएसएसएस के बाहर जाकर खराब हो चुके रेडियो संचार हार्डवेयर को हटाया और नमूने एकत्र किए, जिनसे यह पता चल सके कि परिक्रमा कर रही प्रयोगशाला के बाहरी भाग में सूक्ष्मजीव मौजूद हैं या नहीं। अंतरिक्ष में चहलकदमी 5 घंटे और 26 मिनट तक चली।

स्पेसएक्स फरवरी में चालक दल को घर ले आएगी, जानें खास बातें

विलियम्स और उनके सहयोगी बुच विल्मोर, जो जून 2024 से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर फंसे हुए हैं। दोनों जून बोइंग के स्टारलाइनर पर सवार होकर आईएसएस के लिए आठ दिवसीय मिशन पर गए थे। हालांकि, तकनीकी समस्याओं के चलते स्टारलाइनर उनकी वापसी के लिए असुरक्षित था। इससे पहले नासा ने बुधवार को कहा कि वह अरबपति बिजनेसमैन एलन मस्क की स्पेसएक्स के साथ मिलकर दो अंतरिक्ष यात्रियों (विलियम्स और विल्मोर) को सुरक्षित वापस लाने के लिए काम कर रहा है। मस्क ने विवादास्पद रूप से बाइडेन प्रशासन पर उन्हें अंतरिक्ष में इतने लंबे समय तक छोड़ने का आरोप लगाया था।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने अगस्त में घोषणा की थी कि बोइंग की प्रतिद्वंद्वी स्पेसएक्स फरवरी में चालक दल को घर ले आएगी। लेकिन स्पेसएक्स द्वारा एक नया अंतरिक्ष यान तैयार करने के कारण उनकी वापसी को और स्थगित कर दिया गया। इन बाधाओं के बावजूद, अंतरिक्ष यात्रियों ने सुरक्षित घर वापसी की प्रतीक्षा करते हुए आईएसएस पर अपना काम जारी रखा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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