अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के शक्तिशाली रॉकेट ने चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चंद्रमा की ऐतिहासिक यात्रा के लिए उड़ान भर ली है। यह मिशन 50 साल से अधिक समय बाद पहला मानवयुक्त चंद्रमा की परिक्रमा (मून फ्लाईबाय) है। फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) से स्थानीय समयानुसार मंगलवार शाम करीब 6:35 बजे रॉकेट ने जोरदार गर्जना के साथ उड़ान भरी, जिसे दूर-दूर तक सुना गया।
कनाडा का भी एक अंतरिक्ष यात्री शामिल
चंद्रमा के लिए उड़ान भरने वाले इस दल में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। वर्षों की देरी और बढ़ती लागत के बाद यह मिशन आखिरकार सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है। लॉन्च के दौरान वैज्ञानिकों और दर्शकों ने तालियों के साथ इसका स्वागत किया। कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन (Jeremy Hansen) ने कहा, 'हम पूरी मानवता के लिए यह यात्रा कर रहे हैं।'
कितने दिन की यात्रा पर गया आर्टेमिस?
यह चार अंतरिक्ष यात्रियों का दल चंद्रमा की परिक्रमा के लिए 10 दिनों के ऐतिहासिक मिशन पर गया है। यह मिशन न सिर्फ तकनीक की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए युग की शुरुआत भी माना जा रहा है।
कैनेडी स्पेस सेंटर से इस मिशन की लॉन्चिंग निर्धारित समय 6:24 बजे होनी थी, लेकिन शुरुआती तकनीकी दिक्कतों के चलते इसमें थोड़ी सी देरी हुई। इंजीनियरों की टीम ने सावधानीपूर्वक सभी समस्याओं को दूर करने के बाद मिशन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
चारों अंतरिक्ष यात्रियों के नाम क्या हैं?
इस अंतरराष्ट्रीय दल में रीड विसमैन (Reid Wiseman), विक्टर ग्लोवर (Victor Glover), क्रिस्टीना कोच (Christina Koch) और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। इस यात्रा में शामिल अंतरिक्ष यात्रियों की यह विविधता इस मिशन को वैश्विक सहयोग का प्रतीक भी बनाती है।
क्या चांद पर भी उतरेंगे आर्टेमिस - II के अंतरिक्ष यात्री?
आर्टेमिस-II मिशन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पिछले 50 वर्षों में पहली बार इंसानों को चंद्रमा के इतने करीब ले जाएगा। बता दें कि इससे पहले NASA Apollo Program के दौरान ही मानव चंद्रमा के आसपास गया था। इस बार अंतरिक्ष यात्री चांद पर नहीं उतरेंगे। वैज्ञानिकों का लक्ष्य न सिर्फ चंद्रमा की परिक्रमा करना है, बल्कि अंतरिक्ष में पहले से भी ज्यादा दूरी तय करना है, जो एक नया रिकॉर्ड बना सकता है।
इस मिशन के जरिए वैज्ञानिक गहरे अंतरिक्ष में मानव जीवन, तकनीक और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रयोग करेंगे। भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाने और मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजने की दिशा में यह एक बहुत ही अहम कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टेमिस-II मिशन आने वाले वर्षों में स्पेस रिसर्च को नई दिशा देगा और मानवता को अंतरिक्ष की गहराइयों तक पहुंचाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
