कनाडा में अब जस्टिन ट्रूडो का राज खत्म हो गया है। मार्क कार्नी ने कनाडा के नए पीएम के तौर पर शपथ ले ली है। खालिस्तान को लेकर भारत के साथ संबंध खराब करने वाले जस्टिन ट्रूडो को कुछ महीने पहले तब इस्तीफा देना पड़ गया था, जब उनके अपनों से ही उनके खिलाफ मोर्चा खोल लिया था और इस्तीफे की मांग कर दी थी। कनाडा इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसमें सबसे ऊपर डोनाल्ड ट्रंप हैं, जो कनाडा को अमेरिका में मिलाने की कोशिश में हैं।
कार्नी के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां
पूर्व केंद्रीय बैंकर मार्क कार्नी ने शुक्रवार को कनाडा के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और अब वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए व्यापार युद्ध, विलय के खतरे और एक संभावित आम चुनाव के बीच अपने देश को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। कार्नी ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की जगह ली, जिन्होंने जनवरी में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। लिबरल पार्टी द्वारा नया नेता चुने जाने तक ट्रूडो सत्ता में बने रहे। उम्मीद है कि कार्नी आने वाले दिनों या हफ्तों में आम चुनाव की घोषणा कर सकते हैं। कार्नी ने कहा, ‘‘हम कभी भी, किसी भी तरह से, अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेंगे। अमेरिका, कनाडा नहीं है। हम मूल रूप से एक अलग देश हैं।’’
कनाडा की नई सरकार में कौन-कौन
कार्नी सरकार के नए मंत्रिमंडल को भी शपथ दिलाई गई है। एफ. फिलिप शैम्पेन कनाडा के नए वित्त मंत्री बन गए हैं। मेलानी जोली को विदेश मंत्री के रूप में बरकरार रखा गया है। क्रिस्टिया फ्रीलैंड को परिवहन और आंतरिक व्यापार मंत्री बनाया गया है।फ्रीलैंड पूर्व उप प्रधानमंत्री हैं, जो लिबरल पार्टी के नेतृत्व की दौड़ में कार्नी से पिछड़ गई थीं।
जीत में बदली हार
इस साल संभावित चुनाव में सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी की हार की संभावना जतायी जा रही थी, लेकिन ट्रंप ने शुल्क के रूप में ‘‘आर्थिक युद्ध’’ की घोषणा कर दी और पूरे देश को 51वें प्रांत के रूप में अमेरिका में मिलाने की चेतावनी दी। अब इन बदले समीकरण के चलते लिबरल पार्टी को चुनाव में बढ़त मिलने के दावे किए जा रहे हैं।
