Marathon US-Israel meeting- अमेरिकी मध्यस्थ जारेड कुशनर और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच सोमवार को हुई एक लंबी बैठक के बाद गाजा सीजफायर की संभावनाओं को लेकर तस्वीर अब भी पूरी तरह साफ नहीं है। बैठक के बाद अधिकारियों ने हल्की उम्मीद जताई है, लेकिन इजरायल ने अमेरिका के नए शांति प्रस्ताव पर कोई पक्का वादा नहीं किया है।
हमास की सहमति
हमास पहले ही अमरीका के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर चुका है। अमेरिकी वार्ताकारों ने इजरायल की इस मांग को स्वीकार कर लिया है कि तबाह हो चुके गाजा के पुनर्निर्माण से पहले हमास का पूरी तरह से विसैन्यीकरण होना जरूरी है। बैठक के दौरान इस बात का कोई संकेत नहीं मिला कि इजरायल गाजा के उन 60% हिस्सों से अपनी सेना हटाने पर सहमत हुआ है, जिन पर उसका फिलहाल कब्जा है। हमास ने इस शर्त पर दबाव बनाया था, जो वार्ता में मुख्य बाधा बनी हुई है।
नेतन्याहू का रुख
कुछ दिनों पहले नेतन्याहू ने अमेरिका समर्थित 15-सूत्री रोडमैप को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि हमास के हथियार डाले बिना इजरायली सेना पीछे नहीं हटेगी। नेतन्याहू के साथ हुई इस बैठक में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और 'बोर्ड ऑफ पीस' के निदेशक निकोले म्लादेनोव भी शामिल थे। इससे एक दिन पहले कुशनर ने मिस्र में हमास प्रमुख से दो घंटे तक मुलाकात की थी।
दो वर्किंग ग्रुप का गठन
नेतन्याहू कार्यालय के अनुसार, बातचीत सकारात्मक रही। इजरायल और बोर्ड ऑफ पीस के बीच दो वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति बनी है—पहला गाजा के विसैन्यीकरण पर और दूसरा गाजा में जनस्वास्थ्य के मुद्दों पर। एक अधिकारी के मुताबिक, विसैन्यीकरण में हमास के छोटे-बड़े सभी हथियार और उनकी सुरंगों को नष्ट करना शामिल होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह योजना अभी 'प्रगति पर' है। अब देखना यह होगा कि क्या हमास इन शर्तों का पालन करने के लिए तैयार होता है या नहीं।
आगे का रास्ता और प्रतिक्रियाएं
नेतन्याहू के कार्यालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बातचीत को गहन और रचनात्मक बताया। सुरंगों और हथियारों का खात्मा: बोर्ड ऑफ पीस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि विसैन्यीकरण के तहत हमास के हर तरह के छोटे और भारी हथियार खत्म किए जाएंगे और उसकी सभी सुरंगों को नष्ट किया जाएगा।
अमेरिका और ट्रंप का विजन
अमेरिका का लक्ष्य एक ऐसा गाजा बनाना है जो पूरी तरह से विसैन्यीकृत और कट्टरता-मुक्त हो, ताकि वह इजरायल के लिए कोई खतरा न बने और वहां के नागरिक शांति से अपना जीवन संवार सकें। बैठक के बाद एक अधिकारी ने कहा, इजरायल इस योजना को एक मौका दे रहा है। अब यह हमास पर निर्भर करता है कि वह इन शर्तों का पालन करने की अपनी मंशा दिखाता है या नहीं।
