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मलावी के उपराष्ट्रपति को ले जा रहा विमान लापता, साथ में सवार थे 9 लोग

Malawi Vice President Plane missing: उपराष्ट्रपति के विमान को स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे के बाद देश के उत्तर में स्थित मज़ूज़ू अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरना था। हालांकि, विमान से संपर्क टूट गया, जिसके बाद से बचाव अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि पूरी स्थिति साफ़ होने के बाद ही घटनाक्रम के बारे में जनता को जानकारी दी जाएगी।

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मलावी के उपराष्ट्र

Photo : Twitter

Malawi Vice President Plane missing: मलावी के उपराष्ट्रपति साउलोस चिलिमा को ले जा रहा विमान लापता हो गया है। इस विमान में नौ अन्य लोग भी सवार थे। बताया गया है कि जिस विमान में उपराष्ट्रपति सवार थे, वह मलावी रक्षा बल का विमान था। सोमवार सुबह सुबह राजधानी लिलोंग्वे से रवाना होने के बाद उनका विमान रडार से गायब हो गया। जानकारी सामने आने के बाद मलावी के राष्ट्रपति कार्यालय ने खोज और बचाव अभियान का आदेश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपराष्ट्रपति के विमान को स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे के बाद देश के उत्तर में स्थित मज़ूज़ू अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरना था। हालांकि, विमान से संपर्क टूट गया, जिसके बाद से बचाव अभियान चलाया जा रहा है। उधर, घटना की जानकारी के बाद मलावी के राष्ट्रपति लाज़रस चकवेरा ने बहामास की अपनी यात्रा रद्द कर दी है। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि पूरी स्थिति साफ़ होने के बाद ही घटनाक्रम के बारे में जनता को जानकारी दी जाएगी।

2022 में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार हुए थे उपराष्ट्रपति साउलोस चिलिमा

बता दें, उपराष्ट्रपति साउलोस चिलिमा को 2022 में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर सरकारी अनुबंध देने के बदले में पैसे लेने का आरोप था। हालांकि, पिछले महीने अदालत ने सबूत के अभाव में आरोपों को खारिज कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, उनके विमान के लापता होने का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। मलावी के सूचना मंत्री मूसा कुंकुयू ने बीबीसी को बताया कि विमान को खोजने के प्रयास जारी हैं। कुंकुयू ने बताया कि जिस हवाई अड्डे पर उन्हें उतरना था वो मज़ुज़ू के उत्तरी भाग में है।

पिछले महीने ईरान के राष्ट्रपति की हुई थी मौत

बता दें, पिछले महीने 20 मई को ऐसे ही हादसे में ईरान के राष्ट्रपति व अन्य अधिकारियों की मौत हुई थी। दरअसल, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का विमान भी इसी तरह अजरबैजान से वापस लौटते समय गायब हो गया था। उनके हेलिकॉप्टर में विदेश मंत्री हुसैन अमीराब्दुल्लाहियन, ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत के गवर्नर और अन्य अधिकारी सवार थे। कई घंटों के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद हेलिकॉप्टर का मलबा मिला था। हादसे में राष्ट्रपति समेत सभी की मौत हो गई थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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