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अमेरिका के अगले उपराष्ट्रपति का भी भारत से होगा खास कनेक्शन! कौन हैं ऊषा चिलुकुरी, अमेरिकी चुनाव में जिनके नाम की बढ़ गई चर्चा

Who is Usha Chilukuri Vance: भारतीय मूल की ऊषा चिलुकुरी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जेडी वेंस की पहली मुलाकात 2010 में येन लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। यहीं से दोनों एक-दूसरे के करीब आए और 2014 में हिंदू रीति-रिवाज से दोनों ने शादी कर दी। दोनों के तीन बच्चे हैं।

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जेडी वेंस और उनकी पत्नी ऊषा चिलुकुरी।

Photo : ANI

Who is Usha Chilukuri Vance: अमेरिका की राजनीति में इन दिनों भारतीयों की चर्चा जोरों पर है। जो बाइडन की सरकार में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस भारतीय मूल की ही हैं। अब भारत से जुड़ी एक और शख्सियत की अमेरिका में चर्चा बढ़ गई है। दरअसल, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी की ओर से सीनेटर जेडी वेंस को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना है। अगर जेडी वेंस उपराष्ट्रपति बनते हैं तो उनका भारत से खास कनेक्शन होगा। जेडी वेंस की पत्नी ऊषा चिलुकुरी भारतीय मूल की हैं।

बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने एक समय अपने आलोचक रहे और बाद में करीबी सहयोगी बन गए जेडी वेंस पर भरोसा जताया है। ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल नेटवर्क पर एक पोस्ट में लिखा, लंबे विचार-विमर्श करने और कई अन्य लोगों की प्रतिभाओं पर गौर करने के बाद मैंने फैसला किया है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति पद के लिए सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार ग्रेट स्टेट ऑफ ओहायो के सीनेटर जेडी वेंस हैं। 39 वर्षीय वेंस 2016 में अपने संस्मरण हिलबिली एलेजी के प्रकाशन के साथ खबरों में आए थे। उन्हें 2022 में सीनेट में चुना गया था।

कौन हैं ऊषा चिलुकुरी?

ऊषा चिलुकुरी अमेरिका में एक राष्ट्रीय लॉ फर्म में वकील हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से इतिहास में स्नातक डिग्री और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र में मास्टर्स की डिग्री ली है। रिपोर्ट्स के अनुसाार, ऊषा चिलुकुरी भारी के आंध्र प्रदेश के भारतीय प्रवासियों की बेटी हैं, जो कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में बस गए थे। उनके पिता के एक मैकेनिकल इंजीनियर और मां जीव विज्ञानी हैं।

2014 में हुई थी शादी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऊषा और जेडी वेंस की पहली मुलाकात 2010 में येन लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। यहीं से दोनों एक-दूसरे के करीब आए और 2014 में हिंदू रीति-रिवाज से दोनों ने शादी कर दी। दोनों के तीन बच्चे हैं। जिसमें दो बेटे इवान और विवेक हैं और एक बेटी, जिसका नाम मिराबेल है। एक इंटरव्यू के दौरान ऊषा चिलुकुरी ने कहा था कि मैं एक धार्मिक परिवार में पली-बढ़ी हूं। मेरे माता-पिता हिंदू हैं और यही एक ऐसी बात है जिसने हम दोनों को इतने अच्छे माता-पिता बनाया, यही बात उन्हें वाकई बहुत अच्छे इंसान बनाती है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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